अयोध्या, 1 सितंबर (आईएएनएस)। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य, हनुमानगढ़ी महंत राजू दास, शशिकांत दास ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “राम मंदिर के लिए सीईओ की नियुक्ति को लेकर पूरा अयोध्या, साधु-संतों का समुदाय और कई अन्य लोगों ने विरोध किया है। धार्मिक समिति के कुछ सदस्यों ने भी इसका विरोध करते हुए कहा कि राम मंदिर आस्था का केंद्र है, न कि कोई व्यापारिक केंद्र। सीईओ आमतौर पर व्यापारिक संस्थानों से जुड़े होते हैं और आस्था के केंद्र में सीईओ की कोई जरूरत नहीं है। इसके लिए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और धार्मिक समिति पर्याप्त है।”
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभी सीईओ की नियुक्ति पर तैयार हैं। चढ़ावा मामले में अगर कोई सीईओ होता तो उसे आसानी से हटा देते और मुद्दा शांत हो जाता। भारत के जिन मंदिरों में सीईओ हैं, वहां पर भ्रष्टाचार चरम पर है। इसीलिए हम सीईओ का विरोध करते हैं। राम मंदिर की समीक्षा बैठक हर महीने हो रही है, यह प्रशंसनीय है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसको लेकर समीक्षा बैठक होती रहती है।
हनुमानगढ़ी महंत राजू दास ने कहा कि राम मंदिर की समीक्षा बैठक होना चाहिए। मैं कहता हूं कि राम मंदिर में प्रतिदिन 15-20 हजार लोगों को खाना खिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए। अयोध्या में गौशालाओं की स्थिति खराब है। राम मंदिर ट्रस्ट को इन्हें गोद लाना चाहिए। इसके अलावा जीर्ण अवस्था में पड़े मंदिरों का पुनरुद्धार करने के लिए गोद लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं निवेदन करूंगा कि पूजा की व्यवस्था संतों के पास होनी चाहिए। जिस पूजा को साधु-संत कर लेंगे, कोई दूसरा नहीं कर पाएगा। ठाकुर जी की सेवा,राजभोग और सत्कार साधु सही तरीके से करते हैं।
उन्होंने कहा कि सीईओ का स्वागत है, लेकिन परंपरा का ध्यान रखें। चढ़ावा मामले को लेकर विपक्ष सवाल खड़े कर रहे हैं, उस पर सही तरीके से काम करने की जरूरत है।
वहीं, शशिकांत दास ने कहा कि सीईओ की नियुक्ति का काम सरकार की मंशा के अनुरूप हो रहा है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के अधिकारीगण मंदिर व्यवस्था को देख रहे थे। हालांकि यह बात जरूर कहना चाहूंगा कि जिन्हें राम मंदिर की पूजा-पाठ के संचालन की पद्धति धार्मिक और सांस्कृतिक है। ऐसे में सीईओ को क्या जानकारी होगी, यह गंभीर विषय है लेकिन ट्रस्ट जो निर्णय लेगा वह सर्वमान्य होगा।
