नीमच, 1 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ नीमच जिले में पारंपरिक कारीगरों, छोटे कामगारों और स्वरोजगार की इच्छुक महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बनती नजर आ रही है। योजना के माध्यम से प्रशिक्षण, कौशल विकास और बैंक ऋण की सुविधा मिलने से कई छोटे कारोबारी गुमटी या घरेलू स्तर के काम से आगे बढ़कर अपनी दुकान और व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं।
नीमच जिला पंचायत के सीईओ अमन वैष्णव की मानें तो योजना शुरू होने के बाद जिले में अब तक करीब 36 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 5,500 आवेदनों का सफल पंजीकरण हुआ, जबकि 5,050 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ब्यूटी पार्लर, कारपेंट्री, बार्बर शॉप सहित अलग-अलग ट्रेड में लाभार्थियों को आधुनिक कौशल और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी दी गई।
जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 1,800 ऋण आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके माध्यम से कुल 15.5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे गरीब और छोटे कामगारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है, जो अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या मौजूदा काम को विस्तार देना चाहते हैं।
रक्षिता ब्यूटी पार्लर की संचालक नयागांव की रानी जैन ने बताया कि वह करीब आठ वर्षों से पार्लर का काम कर रही थीं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग मिली। इसके बाद उन्हें 1 लाख रुपए का ऋण मिला, जिससे उन्होंने पार्लर के लिए नए उत्पाद और जरूरी सामान खरीदे। इससे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई।
नयागांव की ही नंदिनी ब्यूटी पार्लर की संचालक सोनम सेन ने बताया कि योजना के तहत 15 दिन की ट्रेनिंग में व्यवसाय चलाने और आगे बढ़ाने के तरीके समझाए गए। बैंक के माध्यम से मिले 1 लाख रुपए के ऋण को उन्होंने अपने व्यवसाय में लगाया। उन्होंने कहा कि पूंजी की कमी के कारण छोटे कारोबार को विस्तार देना मुश्किल होता है। ऐसे में योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हुई।
नीमच की रत्ना व्यास ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उन्हें सिलाई मशीन और 1 लाख रुपए का ऋण मिला। उन्होंने इस राशि से अपने सिलाई व्यवसाय को आगे बढ़ाया। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कपड़े तैयार करने का काम शुरू किया। रत्ना की मानें तो उन्होंने योजना के तहत मिला ऋण भी चुका दिया है और अब थोक में कपड़े लेकर सिलाई का काम कर रही हैं। सिलाई के व्यवसाय ने उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
जावी निवासी दशरथ देवीलाल सेन के लिए भी योजना स्वरोजगार को नई दिशा देने वाली साबित हुई। उन्होंने बताया कि पहले वह गुमटी पर दुकान चलाते थे। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 1 लाख रुपए का ऋण मिलने के बाद उन्होंने अपनी खुद की दुकान स्थापित की। दशरथ को योजना के तहत प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 500 रुपए का भत्ता भी मिला। साथ ही, उन्हें काम से संबंधित किट और मशीनें भी उपलब्ध कराई गईं। अपनी दुकान शुरू होने के बाद उनकी आजीविका पहले की तुलना में बेहतर हुई है।
