चंडीगढ़, 3 सितंबर (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने गुरुवार को पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की। इस दौरान शिअद मांग की कि वे मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर घुमन और उनकी पत्नी गुरप्रीत कौर मान द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से चलाए जा रहे संगठित भ्रष्टाचार रैकेट की जांच कराएं।
शिअद नेताओं ने कहा कि इस मामले की समय-सीमा के भीतर और कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की सिफारिश करें। इन दोनों ने दुष्कर्म और अपहरण के दो मामलों को ‘निपटाने’ के लिए 5 करोड़ रुपए की रिश्वत ली थी।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल की अगुवाई में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने यहां गवर्नर से मुलाकात की और उन्हें इन दो मामलों के बारे में जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री के तुरंत इस्तीफे और उनके ओएसडी व पत्नी गुरप्रीत मान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
गवर्नर को ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बात करते हुए बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री के सबसे करीबी लोगों ने गैंगस्टरों और दुष्कर्म करने वालों के लिए ‘सिंगल-विंडो सर्विस’ शुरू कर दी है। वे पैसे लेकर लगभग हर गैर-कानूनी काम कर रहे हैं, जिसमें जमीन के इस्तेमाल में बदलाव (सीएलयू) और पोस्टिंग व ट्रांसफर शामिल हैं। बादल ने साफ किया कि पार्टी इन दोनों मामलों को उनके तार्किक अंजाम तक पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल और स्त्री अकाली दल 5 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए विरोध प्रदर्शन करेंगे और इसके बाद सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। जब तक न्याय नहीं मिल जाता, हम इस भ्रष्ट सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।
शिअद अध्यक्ष ने पंजाबियों और मीडिया से इस कोशिश में पार्टी का साथ देने की अपील करते हुए कहा कि इस बात के पक्के सबूत हैं कि दुष्कर्म की शिकार पांच महिलाएं न्याय के लिए मुख्यमंत्री से मिली थीं। इसके बावजूद, उनकी पत्नी ने दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामलों में आरोपी को क्लीन चिट दिलाने के लिए 5 करोड़ रुपए के बदले दुष्कर्म करने वाले के साथ मिलीभगत की। ऑडियो और सीसीटीवी फुटेज समेत सभी सबूत सबके सामने हैं। यह भी पता है कि अमृतसर और मोहाली में रेप के दोनों मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की गईं और आरोपी, दुष्कर्म का केस दर्ज होने के दो महीने के अंदर ही बिना किसी सजा के छूट गया। एक तरफ दुष्कर्म करने वाले हैं और दूसरी तरफ दुष्कर्म की शिकार लड़कियां। मुझे पूरी उम्मीद है कि हममें से हर कोई पीड़ितों का साथ देगा।
महेशिंदर सिंह ग्रेवाल, बिक्रम सिंह मजीठिया, डॉ. दलजीत सिंह चीमा और सिकंदर सिंह मलूका वाले प्रतिनिधिमंडल ने गवर्नर को बताया कि कैसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 सितंबर को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया था। इसमें बताया गया था कि कैसे पंजाब में सीएमओ को अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडर, हथियारों के लाइसेंस और जमीन की मंजूरी के लिए एक बाजार बना दिया गया था।
इसमें यह भी बताया गया कि कैसे ईडी के औपचारिक रेफरेंस के बावजूद डीजीपी केस में एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर रहे थे और कैसे वित्त मंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस रेफरेंस को विपक्ष द्वारा हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया दस्तावेज बताकर खारिज कर दिया था।
