कोलकाता, 3 सितंबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को टॉलीवुड अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को 24 दिसंबर 2026 तक या अगले आदेश तक उनके खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह राहत इस शर्त पर दी कि अभिनेत्री जांच में पूरा सहयोग करेंगी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने श्रीलेखा मित्रा के खिलाफ सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में दर्ज सभी आपराधिक मामलों को एक साथ जोड़ने (क्लब) का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इन सभी मामलों की जांच अब कोलकाता के आनंदपुर थाने की पुलिस करेगी, ताकि जांच एक ही जगह से सुविधाजनक तरीके से आगे बढ़ सके।
सुनवाई के दौरान श्रीलेखा मित्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने दलील दी कि जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलन के समर्थन में अभिनेत्री ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। इसके बाद उनके सोशल मीडिया पोस्ट को आधार बनाकर राज्य के अलग-अलग थानों में कई एफआईआर दर्ज कर दी गईं। उन्होंने सभी मामलों को एक साथ जोड़ने और कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि अभिनेत्री द्वारा साझा किए गए कार्टून से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और उसमें प्रधानमंत्री के निजी अंग का आपत्तिजनक संदर्भ दिया गया है।
इस पर अदालत ने पूछा कि क्या इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) लागू होती है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि इस मामले में उक्त धारा लागू नहीं होती।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि संबंधित पोस्ट को “अशोभनीय” कहा जा सकता है, लेकिन अदालत के समक्ष उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह धारा 353(2) के तहत आपराधिक अपराध नहीं बनती।
अदालत ने निर्देश दिया कि पुलिस अभिनेत्री को पूछताछ के लिए कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस जारी करेगी और श्रीलेखा मित्रा को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभिनेत्री जांच में सहयोग नहीं करती हैं तो पुलिस इस आदेश में संशोधन या इसे वापस लेने के लिए अदालत का रुख कर सकती है। साथ ही, आनंदपुर थाना पुलिस को अगली सुनवाई पर जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
