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एयरफोर्स और आईआईटी की पहल, फ्लाइट टेस्ट क्रू के लिए मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम

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नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। कॉकपिट में बैठे वायुसेना के जांबाज पायलटों की भूमिका काफी अहम होती है। आसमान के इन रखवालों को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। इसके तहत वायुसेना के ‘एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल’ ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी संस्थान के साथ हाथ मिलाया है।

इस पहल के अंतर्गत वायु योद्धाओं के लिए एक खास मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। इस नई पहल के अंतर्गत भारतीय वायुसेना और आईआईटी बॉम्बे ने सैन्य विमानन के क्षेत्र में एक सहयोगात्मक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य फ्लाइट टेस्ट क्रू (टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर) के लिए एक विशेष मास्टर्स डिग्री प्रोग्राम शुरू करना है।

इस फ्रेमवर्क के तहत भारतीय वायुसेना के एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल और आईआईटी बॉम्बे मिलकर काम करेंगे। इस समझौते के दौरान पर वायुसेना के सहायक प्रमुख (प्रोजेक्ट्स) एयर वाइस मार्शल आशीष श्रीवास्तव और आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि विभिन्न आईआईटी संस्थान सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण शोध व शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे हैं। सैन्य यूनिफॉर्म से लेकर आधुनिक टेक्नोलॉजी तक आईआईटी के शोधकर्ताओं द्वारा कई शोध किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य सैन्य उड़ान परीक्षण के व्यावहारिक अनुभव को आईआईटी बॉम्बे की उन्नत शैक्षणिक, तकनीकी और अनुसंधान क्षमताओं के साथ जोड़ना है। यह प्रोग्राम टेस्ट पायलटों और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियरों को उच्चस्तरीय तकनीकी ज्ञान प्रदान करेगा, जिससे वे सैन्य विमानों और एविएशन प्रणालियों का सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे।

साथ ही यह कदम देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के विजन को गति देगा और स्वदेशी मिलिट्री एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। सैन्य विमानन में किसी भी नए एयरक्राफ्ट या एविएशन सिस्टम को बेड़े में शामिल करने से पहले उसकी उड़ान परीक्षण प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह अकादमिक साझेदारी रक्षा क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को और अधिक मजबूत करेगी तथा भारत को एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में स्वायत्त बनाने में मदद करेगी।