जगदलपुर, 5 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत, जगदलपुर ने झीरम घाटी हमले से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है।
शनिवार को एनआईए की विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना।
यह मामला 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दरभा क्षेत्र स्थित झीरम घाटी में कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर किए गए नक्सली हमले से जुड़ा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-221 पर हुए इस हमले में कांग्रेस नेताओं और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया था।
एनआईए के अनुसार, हमले के दौरान माओवादियों ने आईईडी विस्फोट किया, अंधाधुंध फायरिंग की और ग्रेनेड दागे। इस हमले में मौके पर ही 24 नागरिकों और पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, जबकि 35 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में घायलों में से तीन अन्य लोगों की भी मौत हो गई थी।
जांच एजेंसी ने बताया कि हमले के बाद माओवादी कैडरों ने मृतकों और घायलों से हथियार, गोला-बारूद, वॉकी-टॉकी सेट, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी लूट लिए थे। एनआईए ने मामले में 25 सितंबर 2014 को आरोप पत्र और 28 सितंबर 2015 को पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। दोनों आरोप पत्रों में कुल 39 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
जांच के दौरान एनआईए ने 101 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज कराए। शुरुआती चरण में 10 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें दोषी पाया। एनआईए की जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन सीपीआई (माओवादी) के सशस्त्र कैडर स्थानीय समितियों और डिवीजनों के साथ मिलकर एक साजिश का हिस्सा थे। उनका उद्देश्य ‘टेक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन’ के तहत परिवर्तन यात्रा में शामिल वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और सुरक्षा बलों के जवानों पर हमला कर उनकी हत्या करना था।
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा पर आदेश अलग से जारी किया जाएगा। यह फैसला झीरम घाटी हमले के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसने वर्ष 2013 में पूरे देश को झकझोर दिया था।
