तेहरान, 6 सितंबर (आईएएनएस)। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का दावा है कि होर्मुज में नाकेबंदी बढ़ाने से ईरान को नहीं बल्कि अमेरिका को ही ज्यादा नुकसान पहुंचेगा।
आईआरजीसी प्रवक्ता ब्रिगेडियर-जनरल हुसैन मोहिबी का ये बयान स्थानीय न्यूज एजेंसी ने प्रकाशित किया। जिनका मत है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक और समुद्री नाकेबंदी का खामियाजा तेहरान के मुकाबले वाशिंगटन को कहीं ज्यादा भुगतना पड़ सकता है।
मोहिबी ने मेहर समाचार एजेंसी को बताया, “अगर अमेरिका ईरान को 1 डॉलर का आर्थिक नुकसान पहुंचाना चाहता है, तो उसे खुद कई डॉलर की लागत और नुकसान उठाना पड़ सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि वाशिंगटन अपनी सैन्य ताकत के दम पर तेहरान को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है; हालांकि, हाल की घटनाओं ने कुछ और ही दिखाया है। भारी कर्ज और चीन व अन्य प्रमुख देशों के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा अमेरिका, ईरान पर अपने हमलों और प्रतिबंधों में सफल नहीं हो पाएगा।”
इस बीच ईरान ने इकोनॉमिक वॉर टास्क फोर्स बनाने का ऐलान भी किया है। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने रविवार को उप-वित्त मंत्री मोर्तेजा जमानियन से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की। जिसमें टास्क फोर्स की गतिविधियों और जिम्मेदारियों का जिक्र था।
जमानियन ने कहा कि वित्त मंत्रालय के तहत बनाई गई इस टास्क फोर्स का मकसद युद्ध जैसे हालात से पैदा होने वाले आर्थिक मुद्दों को सुलझाने में तालमेल और तेजी लाना है।
उनके मुताबिक शुरुआत में इसका ध्यान मंत्रालय के अपने अधिकार और जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों पर होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि युद्ध की वजह से कंपनियों, व्यापार, फाइनेंस और दूसरे आर्थिक क्षेत्रों के सामने आने वाली समस्याओं पर मंत्रालय की क्षमता के दायरे में तेजी से कार्रवाई हो और उन्हें सुलझाया जाए।
हाल ही में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करने की घोषणा की थी। अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर और अलग-थलग करने के लिए हाल ही में ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का ऐलान किया था। उनके मुताबिक इसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाना है।
