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त्रिपुरा में आदिवासी वोटरों को गुमराह कर रहे हैं भाजपा और टिपरा मोथा: कांग्रेस

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अगरतला, 6 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा में 28 सितंबर को होने वाले ग्राम समिति (विलेज कमेटी) चुनाव से पहले कांग्रेस ने भाजपा और उसकी सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) पर आदिवासी मतदाताओं को एक बार फिर “गुमराह” करने का आरोप लगाया है।

पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने रविवार को भाजपा और टीएमपी प्रमुख प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) क्षेत्र के मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए लंबे समय से लंबित त्रिपक्षीय समझौते को चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है।

नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा और टीएमपी के बीच ग्राम समिति चुनाव साथ लड़ने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रॉय बर्मन ने कहा कि चुनावी गठबंधन पर उन्हें कुछ नहीं कहना है, लेकिन यह सवाल जरूर है कि त्रिपक्षीय समझौते को चुनावी गठबंधन से क्यों जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा और टीएमपी की यह आदत बन गई है कि हर दूसरे चुनाव में दोनों साथ लड़ते हैं और टीटीएएडीसी क्षेत्र के लोगों को गुमराह करते हैं।”

कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य रॉय बर्मन ने समझौते के क्रियान्वयन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा, “ए.के. मिश्रा कहां हैं?” उन्होंने केंद्र द्वारा नियुक्त पूर्व वार्ताकार का जिक्र करते हुए कहा कि मार्च 2024 में लोगों से वादा किया गया था कि छह महीने के भीतर समझौता लागू होगा, लेकिन ढाई साल बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले समझौते को फिर से सक्रिय करना केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।

कांग्रेस नेता ने प्रद्योत देबबर्मा, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि वे सार्वजनिक रूप से बताएं कि किन मांगों पर सहमति बनी है।

रॉय बर्मन ने कहा कि कांग्रेस ने अनुच्छेद 275 और 280 के तहत सुरक्षा प्रावधान, अनुच्छेद 371के, प्रस्तावित 125वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने और जनजातीय भाषा कोकबोरोक के लिए रोमन लिपि को मान्यता देने जैसी स्पष्ट मांगें उठाई हैं।

उन्होंने टीटीएएडीसी क्षेत्र के मतदाताओं से भावनाओं के बजाय सोच-समझकर मतदान करने की अपील की और आरोप लगाया कि भाजपा-टीएमपी गठबंधन आदिवासी लोगों की आकांक्षाओं का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

गौरतलब है कि 2 मार्च 2024 को लंबे दौर की बातचीत के बाद टिपरा मोथा ने केंद्र और त्रिपुरा सरकार के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 7 मार्च 2024 को 13 विधायकों वाली टीएमपी भाजपा नीत गठबंधन सरकार में शामिल हो गई थी।

वहीं, 28 सितंबर को होने वाले ग्राम समिति चुनाव से पहले 4 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अहम बैठक हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री माणिक साहा, भाजपा के पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा और टीएमपी प्रमुख प्रद्योत देबबर्मा भी शामिल हुए थे।

दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि भाजपा आगामी ग्राम समिति चुनाव अपने दोनों सहयोगी दलों- टीएमपी और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ मिलकर लड़ेगी।