अगरतला, 6 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को कहा कि समाज को आकार देने और एक विकसित व ज्ञान-आधारित भारत के निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का ध्यान केवल छात्रों को करियर के लिए तैयार करने के बजाय उनके चरित्र-निर्माण पर होना चाहिए।
अगरतला में टीचर्स डे के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में ‘विकसित भारत’ का निर्माण केवल शिक्षकों के ज्ञान, मार्गदर्शन और समर्पण से ही संभव होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “समाज के निर्माण में शिक्षकों का महत्व और योगदान सर्वोपरि है। शिक्षण का पेशा महान और गर्व का विषय है। देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को हमेशा खुद को एक शिक्षक के रूप में पहचान कराने में गर्व महसूस होता था। उनके बहुआयामी करियर की मुख्य नींव शिक्षण और शिक्षा के महान आदर्श थे।”
साहा, जिनके पास प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग का प्रभार भी है, ने यहां रवींद्र शतवार्षिकी भवन में 65वें टीचर्स डे समारोह का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में यह बात कही।
यह कार्यक्रम उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन दर्शन भविष्य के लिए एक उज्ज्वल मार्गदर्शक बना हुआ है, जबकि उनके शैक्षिक दर्शन ने सामाजिक परिवर्तन के लिए एक नया क्षितिज खोला। उन्होंने कहा, “मौजूदा शिक्षकों को ज्ञान प्रदान करके और उत्कृष्टता की ओर मार्गदर्शन करके वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के छात्रों को सच्ची शिक्षा देनी चाहिए। एक समय था जब भारत ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों में से एक था। हमें उस गौरव को फिर से हासिल करने की आवश्यकता है।”
साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य विकास के साथ-साथ देश की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के महत्व पर जोर देते हुए ‘विरासत भी, विकास भी’ के मंत्र का पालन करके ज्ञान-आधारित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता का शिखर उन लोगों के लिए खुला है जो ज्ञान और शिक्षा से समृद्ध हैं।
साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की शिक्षा प्रणाली को सही दिशा में ले जाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति शुरू की। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सरकार ने सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए शिक्षा को तकनीक से भी जोड़ा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य लोगों की सीमाओं को पार करके उन्हें संभावनाओं के पथ पर आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल करियर बनाने के लिए नहीं है और इसका मुख्य उद्देश्य अच्छा चरित्र और जिम्मेदार नागरिक विकसित करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की पहुंच का विस्तार करते हुए छात्रों के कौशल को विकसित करने और उन्हें ज्ञान के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम बनाने के प्रयास भी किए जाने चाहिए। साहा ने कहा कि छात्रों को अच्छी और सार्थक शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि वे देश के विकास और बदलाव में योगदान दे सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असली और अच्छी शिक्षा ही खुशहाली का रास्ता है। सभी स्तरों पर अच्छी शिक्षा को मजबूत किया जाना चाहिए। साहा ने छात्रों को अच्छी शिक्षा देकर और सीखने, नई सोच और सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाकर मानव संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री किशोर बर्मन, शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मिलिंद रामटेक, त्रिपुरा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर योगेश प्रताप सिंह, महाराजा बीर बिक्रम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. बिभास देब और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (अगरतला) के डायरेक्टर अभय कुमार मौजूद थे।
