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क्या खाना है या क्या पहनना है, यह निजी पसंद है, इसे थोपा नहीं जा सकता: बंगाल भाजपा प्रमुख

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कोलकाता, 7 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि कोई व्यक्ति क्या खाता है या क्या पहनता है, यह उसकी निजी पसंद है और ऐसी पसंद निजी ही रहनी चाहिए।

एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि किसी को भी यह तय करने का अधिकार नहीं है कि किसी को क्या खाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि क्या खाना है या क्या पहनना है, यह निजी पसंद है। बंगाल का खान-पान का कल्चर विविध है और हर किसी को अपनी पसंद के अनुसार चलने की आजादी है। क्या बंगाली मछली या मटन नहीं खाएंगे? स्वामी विवेकानंद ने भी इसे सही माना था। किसी संत, नेता या किसी और को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि आपको क्या खाना चाहिए। निजी पसंद निजी ही रहनी चाहिए।

भाजपा नेता की यह प्रतिक्रिया एक मशहूर धार्मिक गुरु के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि दुर्गा पूजा, पंडालों और नवरात्रि के दौरान मांसाहारी भोजन से दूर रहना चाहिए।

इस मुद्दे पर बात करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाली लोग नवमी पर मटन खाते हैं और अष्टमी पर लुची खाते हैं। वे यही खाते हैं। और वे धार्मिक गुरु किसी दूसरी दुनिया के व्यक्ति हैं। उनके बहुत सारे भक्त हैं, पूरे देश में उनके भक्त हैं। मैं भी उनसे मिलने गया था। उनके चेहरे पर एक खास चमक है। मैंने उनके सामने सिर झुकाया। लेकिन उन्हें यह कहने का कोई अधिकार नहीं है कि बंगालियों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। वे जो चाहें कह सकते हैं। लेकिन हम उसे मानें या न मानें, यह हम पर निर्भर करता है।

भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि बंगाली लोग इसे महत्व देंगे या नहीं, यह उनकी अपनी बात है। आजकल बहुत से लोग शाकाहार का प्रचार कर रहे हैं। डॉक्टर भी ऐसा ही कह रहे हैं। लेकिन क्या कोई संत यह तय करेगा कि आप अपने घर में क्या खाएंगे? क्या कोई राजनीतिक पार्टी यह तय करेगी? क्या बंगाली लोग मांस नहीं खाएंगे? क्या वे मछली नहीं खाएंगे? स्वामी विवेकानंद ने इसे सही माना था। स्वामी विवेकानंद से ऊपर उठने की कोशिश करना अब भी खतरनाक है। उस धार्मिक गुरु ने तो बस अपील की है। अब हमें तय करना है कि हम क्या करेंगे।