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पंजाब में मजदूर की आत्महत्या पर सियासत गरमाई, मजीठिया और तरुण चुघ ने मान सरकार को घेरा

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चंडीगढ़, 8 सितंबर (आईएएनएस)। नशे को लेकर पंजाब के दिरबा में एक मजदूर द्वारा आत्महत्या करने पर शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया और भाजपा के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ ने भगवंत मान की सरकार को घेरा है। इसके साथ ही पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “सवाल पूछने की कीमत: मौत! दिरबा के गुलजार सिंह ने हरपाल चीमा से बस नशे की समस्या के बारे में एक सवाल पूछा था और आरोप है कि ‘गुरु-द्रोही’ लोगों ने उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया। उनका शव डीएमसी की मोर्चरी में रखा है। अपने आखिरी बयान में उन्होंने बार-बार कहा, ‘मेरी मौत के लिए हरपाल चीमा जिम्मेदार हैं।’ उन्होंने एक जनसभा में हरपाल चीमा से अपने बेटे की नशे की लत के बारे में सवाल किया था और पूछा था कि नशे को खत्म करने के लिए क्या किया जा रहा है। इसके बाद, आरोप है कि उन्हें ऐसी हालत में पहुंचा दिया गया कि उन्हें सल्फास (जहर) खाने के लिए मजबूर होना पड़ा।”

शिरोमणि अकाली दल के नेता ने कहा, “अब, कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए क्योंकि गुलजार का आखिरी बयान साफ था- ‘मेरी मौत के लिए हरपाल चीमा जिम्मेदार हैं।’ पूरे पंजाब को अब गुलजार सिंह को न्याय दिलाने और उनकी असमय मौत के लिए इंसाफ मांगने के लिए एकजुट होना चाहिए।’ गुरु-द्रोही’ से मेरी तुरंत मांग है कि हरपाल चीमा को कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें जेल भेजा जाए।”

भाजपा के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ ने एक्स पोस्ट पर जारी बयान में कहा, “पंजाब में आम आदमी पार्टी के राज में लोकतंत्र का पूरी तरह से पतन हो गया है। पंजाब के सुपर सीएम केजरीवाल और कठपुतली सीएम गुरु दोखी भगवंत मान के कुशासन में जनता का सवाल पूछना गुनाह बन गया है। सरदार मोहन जीत सिंह के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता पर तो अभी तक मान सरकार सिर्फ लीपापोती कर ही रही थी। दिरबा से एक और भी मार्मिक घटना सामने आई है। गुलजार सिंह नाम के एक मजदूर भाई ने सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो जारी कर बताया कि उनके क्षेत्र में नशे की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है और इसकी चपेट में उनका खुद का बेटा आ गया, जिसने चिट्टा खरीदने के लिए अपनी सारी सम्पत्ति बेच दी। अपनी पीड़ा को व्यक्त करने गुलजार सिंह वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के पास पहुंचे तो उन्होंने समस्या का समाधान भी नहीं किया उल्टे अपने गुर्गे और गुंडे भेज कर गुलजार पर माफ़ी मांगने का दबाव बनाया।”

तरुण चुघ ने आगे कहा, “इस लगातार हो रहे शोषण और अपमान से ग्रस्त होकर गुलज़ार सिंह ने इसी वीडियो में इन सभी रक्षक के रूप में आए भक्षकों के पापों का पर्दाफाश कर जहर खा लिया। इन भक्षकों को यहां भी चैन नहीं मिला तो ये भी प्रयास किए गए कि इन्हें उपचार ना मिले और उन्हें कई अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर किया गया। अंततः गुलज़ार सिंह जी की दुखद मृत्यु हो गई। आज पंजाब के इतिहास में एक बेहद दुखद दिन है। आज केजरीवाल और गुरु दोखी भगवंत मान ने सिद्ध कर दिया है कि उन्होंने पंजाब में लोकतंत्र को पूरी तरह से तिलांजलि दे दिया है। गुलजार सिंह की ये शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। उनकी इस प्राण आहुति से मान सरकार का कुशासन भी जाएगा और अरविंद केजरीवाल का आसमान से ऊंचा घमंड भी। मंत्री हरपाल सिंह चीमा को तत्काल बर्खास्त कर उनके ऊपर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज होना चाहिये।”

वहीं, पंजाब कांग्रेस ने एक्स पोस्ट में कहा, “दुर्भाग्यवश, 50 वर्षीय गुलजार सिंह का देहांत हो गया। उनकी आत्मा को शांति मिले। उनकी मृत्यु राज्य भर में व्याप्त मादक पदार्थों के खतरे की एक कड़वी सच्चाई है, जिसे आप सरकार अपने करोड़ों के विज्ञापनों के जरिए छिपाने की कोशिश करती है। लेकिन सच्चाई को ज़्यादा समय तक छिपाया नहीं जा सकता। इस निर्दोष व्यक्ति के खून से आपके हाथ रंगे हैं।”