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ईरान का जवाबी हमला, तेल टैंकरों पर कार्रवाई के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी बेस को न‍िशाना बनाने का दावा

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तेहरान, 9 सितंबर (आईएएनएस)। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार तड़के घोषणा की कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी एयर बेस पर हमला किया है। आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिका के ‘आक्रामक’ हमलों के जवाब में की गई।

आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि उसने अल-अजराक एयर बेस में अमेरिकी सेना के एफ-35, एफ-16 और एफ-15 लड़ाकू विमानों की मरम्मत, रखरखाव, तैयारी और तैनाती के लिए इस्तेमाल होने वाले एक हैंगर को निशाना बनाया। इसके अलावा, अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए बने एक शेल्टर पर भी हमला किया गया। आईआरजीसी ने दावा किया कि इस हमले में ‘दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया गया।’

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन की सेना ने बुधवार को कहा कि उसके वायु रक्षा सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार, बाकी दो मिसाइलें सुनसान इलाकों में गिरीं और किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।

इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा था कि अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच कच्चा तेल ले जाने वाले टैंकरों को नष्ट कर दिया है। सेंटकॉम के मुताबिक, आईआरजीसी ने दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से एक अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की थी।

अमेरिका के अनुसार, ये हमले मंगलवार (स्थानीय समय) को ओमान की खाड़ी और ईरान के खार्ग द्वीप के पास किए गए। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत पिछले दो दिनों के दौरान हुए दोनों कथित हमलों से सुरक्षित बच निकला और किसी भी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई।

अमेरिकी सेना ने बताया कि ओमान की खाड़ी में नष्ट किए गए टैंकरों के नाम एम/टी कविज, एम/टी चारमीनार, एम/टी होराइजन-1 और एम/टी रिस्को थे। पांचवां टैंकर एम/टी डेर्या था, जिसे खार्ग द्वीप के पास निशाना बनाया गया।

सेंटकॉम के अनुसार, हमले से पहले अमेरिकी बलों ने जहाजों के चालक दल को जहाज छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके बाद जहाजों पर हमला कर उन्हें इस हालत में पहुंचा दिया गया कि वे आगे काम न कर सकें। अमेरिकी सेना ने चालक दल के किसी सदस्य के हताहत होने की जानकारी नहीं दी।

सेंटकॉम ने इन जहाजों को आईआरजीसी की ओर से संचालित कच्चा तेल टैंकर बताया और दावा किया कि वे अरबों डॉलर के एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसका इस्तेमाल ईरानी सैन्य संगठन और उससे जुड़े क्षेत्रीय समूहों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए किया जाता था।

हालांकि, अमेरिकी सेना ने यह नहीं बताया कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के किस युद्धपोत को कथित तौर पर निशाना बनाया था, हमला कहां हुआ था और इसमें कितनी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। पिछले चार दिनों में ईरानी तेल टैंकरों पर यह अमेरिका की दूसरी सैन्य कार्रवाई थी।