रायपुर, 9 सितंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं, सरकारी कर्मचारियों और उद्यमियों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने, स्टार्टअप को बढ़ावा देने, कौशल विकास को मजबूत करने और निर्यात संवर्धन से जुड़े अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अन्य सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी है।
यह नई सीमा राज्य सरकार के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों, निगमों, मंडलों और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदा कर्मियों तथा नगर सैनिकों पर लागू होगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से कर्मचारियों को करियर में आगे बढ़ने के लिए अधिक और समान अवसर मिलेंगे।
राज्य के युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता, नवाचार और कौशल विकास के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण मिशन’ को मंजूरी दी है।
इस मिशन के लिए अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके तहत राज्य के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। 100 उभरती तकनीक प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी। पांच इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
साथ ही, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निपुण जॉब इंजन विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है।
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निर्यात संवर्धन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्रों में विकसित करना है।
इस नीति के तहत निर्यातकों को बेहतर बाजार सुविधा, मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।
कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर के टेंडुवा गांव में राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता निदेशालय को 10 एकड़ जमीन निःशुल्क देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं होंगी। यहां हर वर्ष लगभग 1,000 प्रशिक्षुओं को दीर्घकालीन और 3,000 प्रशिक्षुओं को अल्पकालीन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कैबिनेट ने दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन निर्माण के लिए भूमि अदला-बदली प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इसके तहत तितुर्दीह गांव में बीआईटी कॉलेज के पास चार हेक्टेयर भूमि न्यायालय परिसर के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
बदले में पाटन तहसील के पहांदा गांव स्थित पांच हेक्टेयर सरकारी भूमि भिलाई स्टील प्लांट को दी जाएगी। सरकार के अनुसार दोनों भूखंडों का मूल्य लगभग समान है।
राज्य सरकार का मानना है कि इन फैसलों से रोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास, न्यायिक आधारभूत संरचना और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
