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    एआई बैंकिंग सेक्टर की बढ़ा सकता है दक्षता, एआई एजेंट्स के लिए स्पष्ट ढांचा बनाना आवश्यक :एसबीआई चेयरमैन

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    मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बैंकों को हजारों ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। हालांकि, जैसे-जैसे यह तकनीक सिफारिशें देने से आगे बढ़कर फैसलों को लागू करने की दिशा में बढ़ रही है, वित्तीय संस्थानों को एआई एजेंट्स के लिए स्पष्ट ढांचा तैयार करना होगा। यह बयान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने गुरुवार को दिया।

    ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बोलते हुए शेट्टी ने कहा कि बैंक एआई अपनाने के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं। वित्तीय सेवाओं में एआई एजेंट्स की तैनाती एक बड़ा अवसर प्रदान करती है।

    शेट्टी ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हमेशा मानव संसाधनों की क्षमता बढ़ाने का काम करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई को लागू करने की शुरुआती स्थिर लागत अधिक हो सकती है, लेकिन इसके बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के साथ अतिरिक्त लागत कम हो सकती है, जिससे बैंकों के लिए आर्थिक दक्षता बढ़ सकती है।

    शेट्टी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रणनीतिक क्षमताएं विकसित करने के लिए बुनियादी एआई मॉडल तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई बैंकों को बड़े पैमाने पर ग्राहकों के लिए अधिक व्यक्तिगत सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम बना सकता है।

    हालांकि, उन्होंने कहा कि बैंक इस तकनीक को एक ऐसे बाजार में अपना रहे हैं, जो काफी विविध और जटिल है। इससे वित्तीय संस्थानों के सामने कई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं।

    शेट्टी ने कहा कि बैंक पिछले कई वर्षों से मशीन लर्निंग (एमएल) मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अगला बड़ा अवसर वित्तीय सेवाओं में एआई एजेंट्स की तैनाती में है।

    उन्होंने कहा कि एसबीआई बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को शुरुआती दौर में अपनाने वाले संस्थानों में रहा है। बैंक पहले से ही क्रेडिट आकलन और कैश फ्लो आधारित ऋण देने के लिए पारंपरिक एआई आधारित तरीकों का इस्तेमाल करता है।

    शेट्टी ने तकनीक को अपनाने में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सफलतापूर्वक भरोसे में बदला और फिर उस भरोसे को बड़े पैमाने पर विस्तार में बदला है।”

    उनके अनुसार, जैसे-जैसे एजेंटिक एआई बैंकिंग का अधिक अभिन्न हिस्सा बनता जाएगा, वित्तीय संस्थानों को एआई एजेंट्स की पहचान और प्रमाणीकरण, ग्राहकों की सहमति तथा लेनदेन की सीमाओं को नियंत्रित करने वाले स्पष्ट नियम बनाने होंगे।

    उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई सिस्टम केवल सिफारिशें देने से आगे बढ़कर फैसलों को लागू करना शुरू करेंगे, जवाबदेही का महत्व भी लगातार बढ़ता जाएगा।