लखनऊ, 12 सितंबर (आईएएनएस)। किताबों को नई पीढ़ी से जोड़ने की मुहिम के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को पांचवें गोमती पुस्तक महोत्सव का आगाज हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक प्रांगण में नौ दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान, संस्कार और विचारों को विस्तार देने का सशक्त माध्यम हैं और बदलते डिजिटल दौर में युवाओं को पुस्तकों से जोड़ना समय की जरूरत है।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महोत्सव 12 से 20 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान पुस्तक प्रदर्शनी के साथ लेखक संवाद, संगोष्ठी, कवि सम्मेलन, व्याख्यान, पुस्तक विमोचन, क्विज और किस्सागोई सहित कई रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम होंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि पुस्तकें मनुष्य की अनुभूति, ज्ञान और विचारों का लिपिबद्ध रूप हैं।
उन्होंने कहा कि ज्ञान और विवेक से विचार पैदा होते हैं और जब वही विचार अभिव्यक्ति के रूप में संकलित होते हैं तो पुस्तक का रूप लेते हैं। उन्होंने साहित्य को समाज की संचित ज्ञानराशि का कोष बताते हुए पंडित रामचंद्र शुक्ल का उल्लेख किया। उपाध्याय ने कहा कि पुस्तकें केवल पढ़ने की सामग्री नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति की मार्गदर्शक, मित्र और सलाहकार भी होती हैं। भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपरा को समझने में पुस्तकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में खासकर नई पीढ़ी का पुस्तकों से जुड़ाव कम हुआ है। ऐसे में पुस्तक महोत्सव बच्चों और युवाओं को दोबारा किताबों के करीब लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। एक ही स्थान पर अलग-अलग विषयों और लेखकों की पुस्तकें उपलब्ध होने से पढ़ने की रुचि और अध्ययन की आदत विकसित होती है। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि लखनऊ साहित्य, संस्कृति और कला की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। गोमती पुस्तक महोत्सव नई पीढ़ी को किताबों, साहित्य और संस्कृति से जोड़ने का अभिनव प्रयास है।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा ज्ञान की यात्रा की पहली सीढ़ी है और इस यात्रा में पुस्तक सबसे सहज एवं सशक्त साथी है। किताबें बच्चों को केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि उनके भीतर ज्ञान, विचार, संस्कार, जिज्ञासा और कल्पनाशक्ति विकसित करती हैं। संदीप सिंह ने कहा कि डिजिटल तकनीक आज आवश्यक है, लेकिन पुस्तकें विचारों को आकार देने में अपनी अलग भूमिका निभाती हैं। स्क्रीन दुनिया दिखाती है, जबकि किताबें उसे समझने की शक्ति देती हैं।
उन्होंने युवाओं से देश के इतिहास, संस्कृति और साहित्य से जुड़ी पुस्तकें पढ़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ और प्रयागराज में ‘स्क्रीन से पन्नों का उत्सव’ जैसे आयोजनों के जरिए बच्चों और युवाओं को पुस्तकों से जोड़ने का प्रयास कर रही है। पुस्तक प्रदर्शनी, लेखक संवाद और क्विज जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ने की ओर प्रेरित किया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में शिक्षा को केवल विद्यालय और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उन्हें ज्ञान केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों में आधुनिक आईटी उपकरण, डिजिटल सुविधाएं और बेहतर फर्नीचर उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2,107 राजकीय और 591 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भवनों के जीर्णोद्धार और सुदृढ़ीकरण का काम किया गया है।
गुलाब देवी के अनुसार, 1,841 राजकीय विद्यालयों में आईसीटी लैब और 1,236 में स्मार्ट क्लास स्थापित की गई हैं। 2,332 विद्यालयों में करियर गाइडेंस कार्यक्रम तथा 2,435 विद्यालयों में मिशन शक्ति के तहत छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने, नियमित दिनचर्या अपनाने और मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग उपयोगी और ज्ञानवर्धक सामग्री के लिए किया जाना चाहिए।
–आईएएनएस
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