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18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: शी जिनपिंग का वैश्विक दक्षिण को मजबूत करने पर जोर

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बीजिंग, 13 सितंबर (आईएएनएस)। स्थानीय समयानुसार 13 सितंबर की सुबह, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के नेताओं की 18वीं बैठक के दूसरे चरण में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ‘ब्रिक्स सहयोग की नींव मजबूत करें, वैश्विक दक्षिण की शक्ति को बढ़ाएं’ शीर्षक से महत्वपूर्ण भाषण दिया।

शी जिनपिंग ने कहा कि इस समय दुनिया में सदी के बड़े बदलाव तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और वैश्विक दक्षिण का सामूहिक उदय विश्व बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख शक्ति बन गया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्थिति में उथल-पुथल और अस्थिरता बनी हुई है और विभिन्न जोखिम व चुनौतियां लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में दुनिया को अधिक स्थिर और बेहतर बनाने के लिए ब्रिक्स देशों को ऐतिहासिक अवसरों को थामना होगा, वैश्विक दक्षिण के देशों को एकजुट करना होगा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सकारात्मक, स्थिर तथा रचनात्मक भूमिका निभानी होगी, ताकि पूरी मानवता के साझा हितों को आगे बढ़ाया जा सके।

शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों को मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करनी चाहिए। उन्हें संप्रभु समानता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान जैसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों को बनाए रखना चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू हों और दोहरे मानदंड न अपनाए जाएं।

इसके साथ ही, बहुपक्षवाद का झंडा ऊंचा रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और भूमिका की रक्षा करनी चाहिए तथा बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार का समर्थन करना चाहिए। विश्व व्यापार संगठन के सुधार को सही दिशा में आगे बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार और उसे बेहतर बनाने तथा विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और उनकी आवाज को मजबूत करने की भी जरूरत है।

इसी क्रम में उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों को जनता को केंद्र में रखने वाली विकास अवधारणा पर कायम रहना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास एजेंडा के कार्यान्वयन को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही, वैश्विक सुरक्षा शासन को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों का मिलकर सामना करना चाहिए। वैश्विक जलवायु शासन को बेहतर बनाने और व्यापक सहमति वाला वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन ढांचा जल्द तैयार करने की भी जरूरत है, ताकि उभरती प्रौद्योगिकियां साझा समृद्धि के रास्ते को रोशन कर सकें।

शी जिनपिंग ने कहा कि ‘वृहद ब्रिक्स’ के जरिए बड़ा योगदान देने और अधिक विकास हासिल करने के लिए व्यावहारिक सहयोग की नींव को और मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए उभरते बाजारों और वैश्विक दक्षिण से जुड़े लाभों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा, खुले सहयोग और पारस्परिक लाभ की नीति पर कायम रहना होगा तथा औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता और सुगमता बनाए रखनी होगी।

इसके अलावा, एकीकृत बड़े बाजार के निर्माण, नवाचार के लिए नए मंच तैयार करने, पारंपरिक उद्योगों के उन्नयन, उभरते उद्योगों के विकास और भविष्य के उद्योगों की तैयारी पर भी ध्यान देना होगा।

इसी दिशा में शी जिनपिंग ने ब्रिक्स सहयोग को और गहरा करने के लिए पांच प्रस्ताव रखे। इनमें पहला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ओपन सोर्स और समावेशी पहल; दूसरा, व्यापार और निवेश सुविधा पहल; तीसरा, डिजिटल उद्योग सहयोग पहल; चौथा, स्मार्ट विनिर्माण सहयोग पहल; और पांचवां, प्रौद्योगिकी प्रतिभा विकास पहल है।

शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि इस वर्ष चीन की ’15वीं पंचवर्षीय योजना’ का शुरुआती वर्ष है। उन्होंने कहा कि ’15वीं पंचवर्षीय योजना’ केवल चीन के अपने विकास का खाका नहीं है, बल्कि दुनिया के लिए सहयोग का एक अवसर भी है। चीन उच्च गुणवत्ता वाले विकास को लगातार बढ़ावा देगा, उच्च स्तरीय खुलेपन का विस्तार करेगा, वैश्विक विकास पहल को लागू करेगा और उच्च गुणवत्ता वाले “बेल्ट एंड रोड” सह-निर्माण को आगे बढ़ाएगा।

साथ ही, चीन दुनिया के सभी देशों के साथ विकास के अवसर साझा करेगा और समृद्धि का सह-निर्माण करेगा। इस तरह वैश्विक दक्षिण की एकजुटता और आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय मिलकर लिखा जा सकेगा।

बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद, ब्राजील और सऊदी अरब के विदेश मंत्री, ब्रिक्स साझेदार देशों और अतिथि देशों के नेता या प्रतिनिधि तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक की अध्यक्षता की।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)