नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
16 सितंबर 2026 (बुधवार) को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, सुबह 8:59 बजे तक है। इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करना फलदाई रहेगा।
बुधवार सुबह 6:17 बजे सूर्योदय और शाम 6:26 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 10:52 चंद्रोदय और रात 9:42 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा।
बुधवार को दोपहर 12:21 बजे तक वैधृति योग प्रभावी रहेगा, इसके बाद विष्कुम्भ योग शुरू हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल सुबह 7:53 से 9:37 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल दोपहर 12:21 बजे से 1:52 बजे और गुलिक काल सुबह 10:50 से दोपहर 12:21 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल सुबह 7:48 से 9:19 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
बुधवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेगा। उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
