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एआईएडीएमके को मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव जीतने का भरोसा : पलानीस्वामी

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चेन्नई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु में होने वाले दो सीटों के उपचुनाव में एआईएडीएमके के जनरल सेक्रेटरी के पलानीस्वामी की ओर से जीत का भरोसा जताया गया है। उनकी ओर से मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा एआईएडीएमके का परंपरिक गढ़ बताया गया।

पलानीस्वामी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कहा कि एआईएडीएमके ने 2026 के विधानसभा चुनाव में दोनों सीटें जीती थीं और उसे वहां अभी भी जमीनी स्तर पर काफी समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद (जिनके कारण उपचुनाव हो रहे हैं) मतदाता एक बार फिर पार्टी का समर्थन करेंगे।

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान 6 अक्टूबर को होगा और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। ये सीटें तब खाली हुईं जब एआईएडीएमके के विधायक के मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और पी. सत्यभामा (धरापुरम) ने अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे दिया था और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (टीवीके) में शामिल हो गई थीं।

टीवीके ने अब एआईएडीएमके के इन दो पूर्व विधायकों को उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों से मैदान में उतारा है। सत्ताधारी पार्टी को उम्मीद है कि उसके स्थानीय नेटवर्क, मुख्यमंत्री विजय की लोकप्रियता और उसके ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ की ताकत उसे एक नए राजनीतिक बैनर के तहत दोनों सीटें बनाए रखने में मदद करेगी।

डीएमके ने मदुरंतकम के लिए अपने कानूनी विंग के संयुक्त सचिव एडवोकेट आई. परंथामेन और धारापुरम के लिए एडवोकेट एस. सुगन्य को उम्मीदवार बनाया है।

एआईएडीएमके ने मदुरंतकम के लिए पूर्व विधायक कनिथा संपत और धारापुरम के लिए भानुमति को चुनावी मैदान में उतारा है। ये मुकाबले पलानीस्वामी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। उनकी पार्टी राज्य चुनाव में हार के बाद से ही दलबदल, आंतरिक मतभेदों और विधायी समूह पर उनके नियंत्रण को लेकर उठ रहे सवालों से जूझ रही है।

चुनाव के बाद से एआईएडीएमके के छह विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है या पार्टी छोड़ दी है, जिससे सत्ताधारी टीवीके मजबूत हुई है और विपक्ष के नेतृत्व पर दबाव बढ़ा है। इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में जीत एआईएडीएमके को यह दिखाने में मदद करेगी कि पार्टी छोड़ने वालों के बावजूद उसका संगठनात्मक आधार मजबूत बना हुआ है।

पलानीस्वामी ने कहा कि बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानी हो रही है, परिवारों को रात में मच्छरों के काटने का सामना करना पड़ रहा है और छात्रों की पढ़ाई में बाधा आ रही है। उन्होंने तर्क दिया कि बिजली की स्थिति यह दिखाती है कि सरकार विदेशों में अपने निवेश रिकॉर्ड का प्रचार करने के बावजूद निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने प्रशासन से सुधारात्मक कदम उठाने और घरों, व्यवसायों तथा छात्रों को और अधिक व्यवधान से बचाने का आग्रह किया।