नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिमी वायु कमान ने अपने वायुसेना स्टेशनों पर कामकाज के माहौल को और बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है। इसके तहत 14 सितंबर को मुख्यालय पश्चिमी वायु कमान में स्टेशन मास्टर वारंट अधिकारियों यानी एमडब्ल्यूओ का सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में अलग-अलग स्टेशनों के अनुभवों को साझा करने और बेहतर कार्यप्रणालियों से सीखने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराया गया।
अधिकारियों ने अपने अनुभव और विचार सामने रखे। साथ ही, मौजूदा कामकाज में सुधार की संभावनाओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। चर्चा का खास जोर वायु योद्धाओं और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर रहा। बेहतर कार्य वातावरण तैयार करने, सामने आने वाली सामान्य चुनौतियों का समाधान तलाशने और कल्याणकारी पहलों को मजबूत करने के उपायों पर मंथन किया गया।
इसके पीछे उद्देश्य ऐसा सकारात्मक माहौल तैयार करना है, जिससे वायुसेना स्टेशनों पर काम करने वाले कर्मियों को बेहतर वातावरण मिल सके। इसकी कार्यक्रम की अध्यक्षता पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल जॉर्ज थॉमस ने की। पश्चिमी वायु कमान के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात स्टेशन एमडब्ल्यूओ ने इसमें हिस्सा लिया। सेमिनार में वायुसेना स्टेशनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस दौरान उन क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई, जहां आगे सुधार की जरूरत है। कामकाज के माहौल को बेहतर बनाने, रोजमर्रा की चुनौतियों को दूर करने और कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी पहलों को मजबूत करने पर विचार किया गया।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार प्रभावी संवाद, बेहतर पेशेवर रवैये और कल्याण-केंद्रित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने वायुसेना स्टेशनों पर सकारात्मक और अनुकूल वातावरण बनाने की जरूरत एक महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं, सेमिनार के माध्यम से वायु कमान ने कर्मियों के कल्याण, लगातार सुधार और पेशेवर उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई।
बता दें कि भारतीय वायुसेना ने एक अन्य पहल के तहत ड्रोन व मानवरहित हवाई प्रणालियों की नई क्षमताओं को परखने के लिए ड्रोनाथॉन-2026 की शुरुआत की है। यह विशेष आयोजन सोमवार से पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में हो रहा है। यह अपनी तरह का पहला ड्रोनाथॉन है। इसमें 20 से अधिक प्रमुख रक्षा कंपनियां, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और नवोन्मेषक हिस्सा ले रहे हैं।
पोखरण की वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में ये कंपनियां अपने मानवरहित हवाई तंत्र और उनसे जुड़ी युद्धक व अन्य तकनीकों का प्रदर्शन कर रही हैं।
