बेंगलुरु, 15 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में गणेश चतुर्थी उत्सव को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं के खिलाफ राज्य के डीजीपी को शिकायत सौंपी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि टी. नरसीपुर में श्री विनायक उत्सव के नाम पर सांप्रदायिक दंगे और अशांति फैलाने की कोशिश की जा रही है।
कर्नाटक कांग्रेस नेता एस. मनोहर की ओर से यह शिकायत पुलिस महानिदेशक डॉ. एम. ए. सलीम को सौंपी गई है। शिकायत में भाजपा के वरिष्ठ नेता आर. अशोक, पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा और मैसूर के सांसद यदुवीर वोडेयार का नाम लिया गया है।
पत्र में कहा गया है, “कर्नाटक में शांति और सौहार्दपूर्ण ढंग से श्री विनायक की मूर्ति स्थापित करना और गणेश चतुर्थी मनाना हर किसी का अधिकार है। साथ ही, सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस विभाग का मुख्य कर्तव्य है।”
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा नेता जनहित में पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई सलाह और एहतियाती उपायों का राजनीतिकरण कर रहे हैं और जानबूझकर पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाते हुए बयान दे रहे हैं।
पत्र में लिखा है, “भगवान और धर्म के नाम पर लोगों को राजनीतिक रूप से उकसाने और बेंगलुरु सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोगों को लाकर तनावपूर्ण स्थिति पैदा करने की कोशिशों को लेकर जनता में चिंता है। ऐसी स्थिति जिससे सांप्रदायिक भड़काव हो सकता है।”
कांग्रेस ने मांग की है कि पुलिस विभाग किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए सख्त एहतियाती उपाय करे। विशेष रूप से आर. अशोक और प्रताप सिन्हा के बयानों और गतिविधियों की जांच की जाए कि क्या उनसे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है।
शिकायत में सांसद यदुवीर वोडेयार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि संबंधित स्थान पर पहुंचने के बाद उनके बयानों से तनाव पैदा हुआ है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एस. मनोहर ने पत्र में लिखा, “जिम्मेदार पदों पर बैठे जन-प्रतिनिधियों को धर्म के नाम पर लोगों को उकसाने या राजनीतिक लाभ उठाने की किसी भी कोशिश की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अगर जांच में कानून का उल्लंघन होता है, तो विपक्षी पार्टी के नेताओं आर. अशोक, प्रताप सिम्हा, यदुवीर वोडेयार और अन्य संबंधित नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।”
कांग्रेस ने कहा कि गणेश उत्सव शांति, सद्भाव और मिल-जुलकर रहने का प्रतीक होना चाहिए। किसी भी धार्मिक त्योहार का इस्तेमाल सांप्रदायिक तनाव या राजनीतिक टकराव के लिए नहीं होने देना चाहिए।
