किंशासा, 15 सितंबर (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में मंगलवार को इबोला को लेकर सरकारी आंकड़े जारी किए गए। इसके अनुसार इबोला के 7,200 से ज्यादा कन्फर्म मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि महामारी के मामलों में कुल मिलाकर कमी आ रही है, फिर भी कई प्रांतों में इसका संक्रमण लगातार फैल रहा है।
रविवार तक की सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सात प्रांतों में 7,258 कन्फर्म मामले दर्ज किए गए, जिनमें 3,510 मौतें और 1,726 लोग ठीक हुए। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 905 मरीज आइसोलेशन में थे या अस्पताल में भर्ती थे, जबकि कुल मृत्यु दर 48.4 प्रतिशत थी।
सोमवार को किंशासा में एक रणनीतिक समन्वय बैठक के बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रमुख डियूडोन म्वाम्बा कजादी ने कहा कि महामारी का ग्राफ नीचे की ओर जा रहा है। अगस्त के मध्य में यह अपने चरम (पीक) पर पहुंच गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि देशभर में यह गिरावट एक जैसी नहीं है। कुछ प्रांतों, खासकर नॉर्थ किवु मेंअभी भी मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि इबोला प्रकोप अब “नियंत्रण में” है और इसका सबसे गंभीर चरण (पीक) गुजर चुका है। स्थानीय स्तर पर संक्रमण के नए मामले, बीमारी का लगातार फैलना और सातवें प्रांत तक इसका विस्तार होना अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।
सरकार के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक की रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा, “17वां इबोला प्रकोप अब नियंत्रण में है और इसका चरम अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में पहुंच गया था। उन्होंने यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा का हवाला देते हुए दी।
सरकार के अनुसार, अधिकांश प्रमुख संकेतक मामलों में गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं। प्रकोप के हालिया विस्तार से पहले प्रभावित 10 स्वास्थ्य क्षेत्रों में कम से कम 21 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है। वहीं, प्रकोप के केंद्र रहे पूर्वी प्रांत इटुरी के कई इलाकों में संक्रमण की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है।
यह प्रकोप सात प्रांतों के 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों को प्रभावित कर चुका है। इनमें इटुरी, नॉर्थ किवू, साउथ किवू, हाउत-उएले, बास-उएले, त्शोपो और सुद-उबांगी शामिल हैं। इटुरी, नॉर्थ किवू और हाउत-उएले में संक्रमण का लगातार प्रसार जारी रहा, जबकि त्शोपो और बास-उएले में छिटपुट मामले दर्ज किए गए।
मई में घोषित यह प्रकोप डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला महामारी प्रकोप बन गया है। साथ ही, यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है। इससे बड़ा प्रकोप केवल 2014-2016 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में फैली इबोला महामारी थी।
