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सागर जहरीली शराब कांड: मानवाधिकार आयोग की टीम बांदा पहुंची, पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

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सागर, 15 सितंबर (आईएएनएस)। सागर जिले में अवैध शराब के सेवन से हुई मौतों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने प्रभावित क्षेत्र के बांदा पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने परिवारों से घटना की जानकारी ली और पुलिस-प्रशासन से मामले में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि पीड़ित परिजनों के बयान तत्काल दर्ज किए जाएं और अवैध शराब की सप्लाई और बिक्री से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रियांक कानूनगो ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सागर जिले में अवैध शराब के सेवन के कारण कई लोगों की मौत हुई है और इसी सिलसिले में वह पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। कई परिजनों ने शिकायत की कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अभी तक उनके बयान दर्ज नहीं किए हैं।

कानूनगो ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि घटना में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि जांच में कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह पालन होना चाहिए, ताकि मामले की कार्रवाई मजबूत और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े। कुछ पीड़ित परिवारों ने शिकायत की है कि गांवों में शराब पहुंचाने वाले सप्लायरों के नाम उनके बयानों में दर्ज नहीं किए गए। इसके कारण ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाने की आशंका जताई गई है।

कानूनगो ने पुलिस से कहा कि अवैध शराब की सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क से लेकर गांवों में शराब बेचने वाले एजेंटों तक सभी की पहचान की जाए। उन्होंने विशेष रूप से गांवों में मोटरसाइकिलों के माध्यम से शराब पहुंचाने या बेचने वाले लोगों की सूची तैयार करने और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने को कहा।

उन्होंने कहा कि जांच और कानूनी कार्रवाई इतनी मजबूत होनी चाहिए कि किसी भी स्तर पर ऐसी कमी न रह जाए जिसका फायदा आरोपी अदालत में उठा सकें। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घटना के लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच हो और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा मिले। कानूनगो ने कहा कि इस घटना के बाद प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाए और प्रभावित क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद हो।

उन्होंने घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने के प्रयासों पर भी टिप्पणी की। कानूनगो ने कहा कि पीड़ितों की मदद और जांच की प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद में बदलने से वास्तविक पीड़ितों को नुकसान हो सकता है। इस समय पीड़ित परिवारों को राहत और न्याय दिलाना सबसे महत्वपूर्ण है।

मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें मुआवजे से संबंधित जानकारी दी गई है। जिन मामलों में मृत्यु का कारण अवैध शराब या नशीले पदार्थों से जुड़ा पाया गया है, उन मृतकों के परिवारों को प्रति व्यक्ति चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के लिए राशि उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सात ऐसे मामले भी प्रशासन के संज्ञान में आए हैं, जिनमें डॉक्टरों की ओर से मृत्यु का कारण अभी निर्णायक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे मामलों में दो-दो लाख रुपये के मुआवजे की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी उन्हें दी गई है।

कानूनगो ने प्रशासन से कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और अगले दिन तक पात्र परिवारों को राशि वितरित करने का प्रयास किया जाए। कुछ लोगों ने यह शिकायत भी की है कि मृत्यु का कारण अभी स्पष्ट नहीं होने की वजह से उनके परिजनों के नाम मृतकों की सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं। यदि ऐसे परिवार आयोग के समक्ष शिकायत करते हैं तो उनकी शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र में हुई सभी मौतों के आंकड़ों का मिलान कराने की जरूरत बताई। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वास्तविक रूप से प्रभावित किसी परिवार का नाम राहत और मुआवजे की प्रक्रिया से बाहर न रह जाए।

मानवाधिकार आयोग ने घटना में अपने परिजनों को खोने वाले बच्चों के भविष्य को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। कानूनगो ने बताया कि जिन बच्चों के परिवार के सदस्यों की मृत्यु हुई है और जो इसके कारण अनाथ या अत्यधिक प्रभावित हुए हैं, उनके लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया गया है। ऐसे बच्चों को भारत सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक और सामाजिक सहायता मिल सके और उनकी पढ़ाई तथा भविष्य प्रभावित न हो।

प्रियांक कानूनगो ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलुओं में से एक यह है कि जिस शराब से लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, उसकी बिक्री कथित तौर पर शासकीय परमिट वाली दुकान से हुई थी। इस पहलू की भी गंभीरता से जांच की आवश्यकता है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि शराब की बिक्री और आपूर्ति की पूरी श्रृंखला क्या थी, संबंधित दुकान की भूमिका क्या रही और नियमों का पालन हुआ था या नहीं।