पुणे, 18 सितंबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को पुणे के श्री गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच में 38वें पुणे फेस्टिवल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार, सांसद हेमा मालिनी, सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश को अपने इतिहास और अपने वीरों के महान बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू धर्म और भारत की सभ्यतागत विरासत की रक्षा में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
उन्होंने महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का भी जिक्र किया। राधाकृष्णन ने कहा कि मराठा शासकों के प्रयासों की वजह से तमिल साहित्य की अमूल्य धरोहर आज भी तंजावुर की सरस्वती महल लाइब्रेरी में सुरक्षित है।
उपराष्ट्रपति ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, महात्मा ज्योतिबा फुले, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पुणे के वैश्विक स्वरूप की सराहना करते हुए उन्होंने उद्घाटन समारोह में विदेशी छात्रों की भागीदारी की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि करीब 20 देशों के छात्रों ने पारंपरिक गणेश पूजा कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जो “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना का सुंदर उदाहरण है।
राधाकृष्णन ने कहा कि पुणे शिक्षा, उद्योग, खेल, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल निर्माण, पर्यटन और बागवानी का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जबकि उसने अपनी सांस्कृतिक पहचान भी बरकरार रखी है। उन्होंने पुणे फेस्टिवल को शहर को “सिटी ऑफ फेस्टिवल्स” के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला बताया और इसके संस्थापक दिवंगत सुरेश कलमाड़ी के दृष्टिकोण की सराहना की।
उन्होंने युवा और उभरते कलाकारों को मंच देने वाली ‘उगवते तारे’ और ‘इंद्रधनु’ जैसी प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। साथ ही ‘महिला महोत्सव’ को महिला कलाकारों की प्रतिभा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सभ्यतागत विरासत से जुड़े रहते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिकता और तकनीकी प्रगति परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की भी परिकल्पना करता है। ऐसे सांस्कृतिक उत्सव सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, स्थानीय प्रतिभा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देते हैं।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने वरिष्ठ अभिनेता मोहन जोशी को भारतीय सिनेमा और रंगमंच में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए संस्थापक सुरेश कलमाड़ी पुणे फेस्टिवल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया।
