मुंबई, 19 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्मकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने सिर्फ फिल्में नहीं बनाईं, बल्कि अपनी कहानियों के जरिए समाज, रिश्तों और इंसानी भावनाओं को पर्दे पर उतारा। महेश भट्ट भी ऐसे ही निर्देशकों में शामिल हैं। करीब पांच दशक लंबे फिल्मी सफर में महेश भट्ट ने ‘सारांश’ जैसी गंभीर फिल्म हो या ‘आशिकी’ जैसी रोमांटिक कहानी, उन्होंने हर बार दर्शकों के दिलों पर अलग छाप छोड़ी।
20 सितंबर 1948 को मुंबई में जन्मे महेश भट्ट का बचपन आसान नहीं था। पिता नानाभाई भट्ट भी फिल्म निर्माता थे, लेकिन उन्होंने महेश की मां शिरीन मोहम्मद अली से शादी नहीं की थी। इस वजह से महेश भट्ट को तानों का सामना करना पड़ता था। घर की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं थी। इन सबके चलते महेश भट्ट ने ठान लिया था कि वे जिंदगी में सफलता की सीढ़िया चढ़ेंगे।
महेश भट्ट का फिल्म इंडस्ट्री में खास संपर्क नहीं था, लेकिन फिल्मों के प्रति उनका जुनून उन्हें महबूब स्टूडियो तक ले गया। महेश भट्ट ने स्टूडियो में काम पाने के लिए झूठ बोला। उन्होंने कहा कि वह फिल्म निर्देशक राज खोसला को जानते हैं। जब उनसे सच पूछा गया, तो उन्होंने झिझकते हुए सब कुछ बता दिया। इस पर राज खोसला ने उनकी ईमानदारी को सराहा और अपनी टीम में उन्हें असिस्टेंट बना लिया। यहीं से महेश भट्ट के फिल्मी करियर की असली शुरुआत हुई थी।
1974 में महेश भट्ट ने ‘मंजिलें और भी हैं’ फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में ही उनकी फिल्मों में व्यक्तिगत अनुभवों और समाज के वास्तविक मुद्दों की झलक दिखाई देने लगी थी। भट्ट ने ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘नाम’, ‘अवारगी’, और ‘कश्मकश’ जैसी फिल्में बनाई, जिनमें समाज को असली आईना दिखाया। 1984 में आई फिल्म ‘सारांश’ को खूब सराहा भी गया।
महेश भट्ट ने 1990 के दशक में विशेष फिल्म्स नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया। इस बैनर के तले उन्होंने ‘राज’, ‘मर्डर’, ‘जिस्म’, ‘जन्नत’, और ‘आशिकी 2’ जैसी हिट फिल्मों को प्रोड्यूस किया। इन फिल्मों ने न सिर्फ नए कलाकारों को मौका दिया, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी खूब कमाई की। 1998 की फिल्म ‘जख्म’ ने भट्ट को राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘तमन्ना’, और ‘गुड़िया’ जैसी फिल्मों के लिए भी भट्ट ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।
1990 में रिलीज हुई आशिकी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि इसका संगीत भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके बाद महेश भट्ट का नाम उन फिल्मकारों में शामिल हो गया जो गंभीर विषयों के साथ-साथ मनोरंजन को भी प्रभावी ढंग से पर्दे पर पेश कर सकते थे।
महेश भट्ट की फिल्म ‘जख्म’ को उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म को राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड मिला। ‘जख्म’ को उनके निजी अनुभवों से जुड़ी फिल्म के तौर पर भी देखा जाता है।
महेश भट्ट ने दो शादियां कीं है। जब महेश भट्ट कॉलेज में थे और लोरिएन बॉम्बे स्कॉटिश अनाथालय में पढ़ती थीं। एक बार महेश भट्ट उनसे मिलने के लिए अनाथालय की दीवार कूदकर अंदर चले गए थे, लेकिन पकड़े गए। इसके बाद महेश भट्ट ने लोरिएन का वाईडब्ल्यूसीए में दाखिला करवा दिया। दोनों ने शादी का फैसला किया और लोरिएन ने अपना नाम बदलकर किरण रख लिया। दोनों ने 20 साल की उम्र में शादी कर ली। शादी के एक साल बाद ही पूजा भट्ट का जन्म हुआ। इस दौरान महेश भट्ट का नाम परवीन बाबी के साथ जुड़ने लगा था और उनका पत्नी के साथ भी अलगाव हो गया। बताया जाता है कुछ दिन परवीन के साथ महेश भट्ट लिव इन में भी रहे।
1984 में फिल्म ‘सारांश’ की शूटिंग के दौरान महेश सोनी राजदान से मिले थे। जल्द ही दोनों को प्यार हो गया। जिस समय महेश का अफेयर सोनी से था, उस वक्त वह अपनी पहली पत्नी किरण के साथ ही रह रहे थे। बाद में सोनी और महेश ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया और फिर 1986 में शादी रचाई। इस कपल की दो बेटियां शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट हैं। महेश भट्ट की पहली पत्नी किरण से दो बच्चे पूजा और राहुल भट्ट हैं।
