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सुखोई व राफेल के साथ दिखा जापान के एफ-2 लड़ाकू विमान का दम

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नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के आसमान में इन दिनों भारत और जापान के लड़ाकू विमानों की गूंज सुनाई दे रही है। दोनों देशों की वायुसेनाएं संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ के तहत युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी हवाई युद्धक क्षमताओं को परख रही हैं। अभ्यास अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक से जुड़े कई अभियानों का अभ्यास किया है।

अभ्यास में भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों शामिल रहे। वहीं जापानी वायुसेना ने अपने एफ-2ए लड़ाकू विमान के साथ शिरकत की। इस चौदह दिवसीय अभ्यास में भाग लेने वाले वायु सैनिक उन्नत परिचालन मिशनों को अंजाम दिया गया। जोधपुर में दोनों सेनाओं के बीच व्यापक पेशेवर संवाद हुए। इस युद्धाभ्यास में मिशन योजना सम्मेलन, विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, इंजीनियरिंग व अंतरिक्ष सुरक्षा के पहलुओं पर भी वार्ता हुई। इससे दोनों वायु सेनाओं के बीच गहन परिचालन तालमेल को बढ़ावा मिला है।

जापानी एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमानों की मौजूदगी इस संयुक्त अभ्यास का खास आकर्षण रही। दरअसल ‘वीर गार्जियन 2026’ इसी महीने 9 सितंबर से शुरू हुआ था और 22 सितंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ दोनों वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल और आपसी समझ को बढ़ाना है। यह ‘वीर गार्जियन’ का दूसरा संस्करण है। इससे पहले 2023 में ‘वीर गार्जियन 23’ का आयोजन जापान में हुआ था। उस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पहली बार जापान में इस संयुक्त हवाई अभ्यास में हिस्सा लिया था। वहीं, ‘वीर गार्जियन 2026’ जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमानों का भारत में पहला संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है।

अभ्यास के दौरान दोनों देशों के वायु योद्धा अलग-अलग हवाई अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही, वे एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और युद्धक तौर-तरीकों को समझ रहे हैं। संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय विकसित करना भी अभ्यास का अहम हिस्सा है। ‘वीर गार्जियन 2026’ के जरिए दोनों देशों की वायुसेनाओं को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं को परखने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिल रहा है।

–आईएएनएस

जीसीबी/एएस