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गोवा में ‘दिशा 2.0’ कार्यशाला 21 सितंबर से, नागरिकों को कानूनी अधिकारों के प्रति किया जाएगा जागरूक

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पणजी, 20 सितंबर (आईएएनएस)। न्याय वितरण प्रणाली को अधिक नागरिक केंद्रित बनाने, कानूनी जागरूकता बढ़ाने और सभी वर्गों के लोगों को समयबद्ध तथा सुलभ न्याय सुनिश्चित करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सोमवार से कार्यशाला ‘डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (दिशा 2.0) शुरू होगी। यह कार्यशाला गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईयूएलईआर) के यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में आयोजित की जाएगी।

एक अधिकारी ने बयान में कहा कि क्षेत्रीय कार्यशाला में कानूनी सशक्तीकरण, नागरिक-केंद्रित न्याय वितरण और न्याय तक समान पहुंच के संवैधानिक दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए आवश्यक सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

यह कार्यशाला प्रौद्योगिकी-आधारित कानूनी सेवाओं, कानूनी जागरूकता पहलों और देशभर में निशुल्क कानूनी सहायता को बढ़ावा देने के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के लिए विभाग के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है।

गोवा के राज्यपाल इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। उम्मीद है कि भारत सरकार में विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और गोवा सरकार में लोक निर्माण विभाग, बंदरगाह प्रमुख और कानूनी मापन मंत्री भी उपस्थित रहेंगे।

बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों, कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी), ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्य के विधि संस्थानों और न्याय की सुलभता और समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि एक साथ आएंगे।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘न्याय प्रबोध: न्याय की जागृति’ अभियान के तहत बनाई गई सर्वश्रेष्ठ रीलों का प्रदर्शन होगा – 90 सेकंड में अपने अधिकार जानें, जिसके बाद न्याय प्रबोध के अंतर्गत एक नारा प्रतियोगिता का शुभारंभ होगा।

इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की गहरी समझ प्रदान करना, कानूनी साक्षरता को बढ़ावा देना और न्याय वितरण प्रणाली में जनता की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

कार्यशाला में गोवा में दिशा 2.0 की उपलब्धियों को दर्शाने वाली एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी होगा, जिसके बाद टेली-लॉ लाभार्थियों, पैनल वकीलों, ग्रामस्तरीय उद्यमियों (वीएलई) और न्याय सहायकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद होगा।

इन संवादों से पता चलेगा कि कैसे प्रौद्योगिकी आधारित कानूनी सेवाएं नागरिकों और न्याय संस्थानों के बीच की खाई को पाटने में मदद कर रही हैं, विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में।