नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने बाबा रामदेव के देश में गृहयुद्ध की स्थिति संबंधी बयान, बिहार के जमुई में युवती से छेड़छाड़ की घटना, बाबा बागेश्वर की रथ यात्रा और दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर बिहार सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और SIR प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई।
बाबा रामदेव के उस बयान के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें देश में गृहयुद्ध जैसे हालात की बात कही गई थी, सुधाकर सिंह ने कहा कि बाबा रामदेव कोई राजनेता नहीं हैं और उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उन्होंने किस संदर्भ में यह बात कही है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि आखिर देश में गृहयुद्ध की स्थिति क्यों पैदा होगी और ऐसी कौन-सी नई परिस्थिति बन गई है, जिसके कारण इस तरह की आशंका जताई जा रही है। देश में संविधान के दायरे में रहकर जो कार्य संभव हैं, वे किए जा रहे हैं। यदि मुद्दा सामाजिक न्याय से जुड़ा है, तो उसमें गृहयुद्ध की बात कहां से आती है, यह समझ से परे है।
बिहार के जमुई में युवती से छेड़छाड़ की घटना पर सुधाकर सिंह ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है और आए दिन हत्या, लूटपाट, दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। जमुई की घटना कोई अकेली घटना नहीं है। राज्य के अलग-अलग जिलों से इस तरह की घटनाओं की खबरें आती रहती हैं। कई घटनाएं सामने नहीं आ पातीं क्योंकि उनका वीडियो या अन्य प्रमाण उपलब्ध नहीं हो पाता।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस और शराब माफिया के बीच मिलीभगत है। उन्होंने पुलिस मुख्यालय और कानून-व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति और खराब हो सकती है।
बाबा बागेश्वर की रथ यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर सुधाकर सिंह ने कहा कि देश में इस तरह के कई बाबा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बाबाओं का अधिकांश समय घूमने और धार्मिक आयोजनों में बीतता है तथा वे समाज सेवा के बजाय अपनी सुविधाओं पर अधिक ध्यान देते हैं। कभी हेलीकॉप्टर, कभी विमान और कभी रथ के जरिए यात्रा करने वाले इन बाबाओं को लेकर उनके मन में यह सवाल है कि उन्होंने समाज के लिए किस तरह की सेवा की है।
उन्होंने बाबा बागेश्वर जैसे बाबाओं की कार्यशैली को पारंपरिक सन्यासियों से अलग बताते हुए कहा कि ये ‘नए जमाने के बाबा’ हैं, जो सोशल मीडिया और रील्स के माध्यम से लोकप्रिय होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर वह आमतौर पर ऐसे बाबाओं के बारे में बयान देने से बचते हैं।
एसआईआर अभियान के तहत दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस दिए जाने के मुद्दे पर भी सुधाकर सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह स्वयं एसआईआर से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता हैं। यदि इसी तरह की स्थिति बनी रही और अलग-अलग लोगों को नोटिस भेजे जाते रहे तो चुनाव की जरूरत ही क्या रह जाएगी। उन्होंने न्यायपालिका से जुड़े लोगों के नामों को लेकर भी नोटिस जारी होने की बात कहते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर चिंता जताई। चुनाव व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहना जरूरी है।
एसआईआर के मुद्दे पर सुधाकर सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने गोरखपुर मठ के मठाधीश और मुख्यमंत्री के पद से जुड़े संबंधों पर सवाल उठाया और कहा कि एक ही व्यक्ति दोनों भूमिकाएं कैसे निभा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग स्वयं सनातन परंपराओं का पालन नहीं करते, उन्हें दूसरों को सनातन धर्म पर प्रवचन देने से पहले अपने आचरण पर विचार करना चाहिए।
