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बर्लिन में गूंजा नमो भारत का मॉडल, इनो ट्रांस-2026 में प्रदर्शित हुआ भारत का रीजनल रेल नेटवर्क

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बर्लिन, 23 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) नमो भारत अब वैश्विक परिवहन तकनीक के मंच पर अपनी पहचान बना रही है। बर्लिन में 22 से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित हो रहे दुनिया के प्रमुख परिवहन तकनीकी व्यापार मेले इनो ट्रांस-2026 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने नमो भारत को प्रदर्शित किया है।

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के राजधानी विकास विभाग की सचिव और एनसीआरटीसी की चेयरपर्सन डी. थारा (आईएएस) ने एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल की मौजूदगी में प्रदर्शनी स्टॉल का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में एनसीआरटीसी की ओर से 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है।

फरवरी 2026 में पूरे कॉरिडोर के परिचालन में आने के बाद इसे दिल्ली-एनसीआर में क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इनो ट्रांस के दौरान आयोजित रेल लीडर्स समिट-2026 में डी. थारा ने क्षेत्रीय रेल की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में रोजगार के लिए पूरी आबादी को बसाना व्यावहारिक और किफायती नहीं है। ऐसे में रीजनल रेल शहरों से कुछ दूरी पर रहने वाले लोगों को तेज, सुविधाजनक और अपेक्षाकृत कम लागत वाला आवागमन उपलब्ध करा सकती है।

उन्होंने बताया कि 82 किलोमीटर लंबे नमो भारत कॉरिडोर पर वर्तमान में प्रतिदिन करीब 1 से 2 लाख यात्री यात्रा कर रहे हैं। उनके अनुसार, क्षेत्रीय रेल से दिल्ली में भीड़भाड़ कम करने के साथ-साथ आसपास के शहरों को राजधानी से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है। एनसीआरटीसी भविष्य में ऐसे कई और कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर भी काम कर रहा है। नमो भारत कॉरिडोर को यात्रियों की ओर से लगातार अच्छा रिस्पॉन्स मिलने का दावा किया गया है।

एनसीआरटीसी के मुताबिक, कॉरिडोर ने अब तक 4.5 करोड़ से अधिक कम्यूटर जर्नी पूरी कर ली हैं। हाल ही में इस कॉरिडोर पर एक दिन में 1.68 लाख से अधिक यात्रियों की सर्वाधिक दैनिक यात्री संख्या दर्ज की गई। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने कहा कि नमो भारत भारत की आधुनिक क्षेत्रीय परिवहन समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण और संचालन में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इनमें एलटीई बैकबोन पर ईटीईएस हाइब्रिड लेवल-3 सिग्नलिंग भी शामिल है, जिसे एनसीआरटीसी के अनुसार विश्व में पहली बार इस तरह प्रयोग किया जा रहा है।

नमो भारत परियोजना का उद्देश्य केवल तेज आवागमन उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच आर्थिक एवं रोजगार संबंधों को मजबूत करना भी है। बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के जरिए दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के बीच आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। इस परियोजना की एक खास विशेषता यह भी है कि नमो भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही मेरठ मेट्रो की सुविधा विकसित की जा रही है। इससे एक ही कॉरिडोर पर क्षेत्रीय और स्थानीय परिवहन सेवाओं का एकीकरण संभव हुआ है।

एनसीआरटीसी के मुताबिक, मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन, यात्री-केंद्रित सुविधाओं और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उसके कार्यों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराहना मिली है। नमो भारत की परिकल्पना शहरी क्षेत्रों में बढ़ती भीड़भाड़ और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ दीर्घकालिक सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है। क्षेत्रीय रेल के जरिए लोगों को रोजगार और आर्थिक केंद्रों तक बेहतर पहुंच देने तथा महानगरीय क्षेत्र में बहुकेंद्रीय विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।

एनसीआरटीसी भारत सरकार और दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश सरकारों का संयुक्त उपक्रम है, जो आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है। एनसीआरटीसी को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नमो भारत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बर्लिन में हर दो साल में आयोजित होने वाला इनो ट्रांस रेलवे तकनीक, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक परिवहन, इंटीरियर और टनल निर्माण समेत परिवहन क्षेत्र की अत्याधुनिक तकनीकों के लिए वैश्विक मंच उपलब्ध कराता है। वर्ष 2026 के संस्करण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस पब्लिक ट्रांसपोर्ट और डिजिटल सॉल्यूशंस जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।