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जी-4 मंत्रियों ने उठाया यूएनएससी में सुधार का मुद्दा, स्थायी-अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग

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संयुक्त राष्ट्र, 24 सितंबर (आईएएनएस)। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान जी-4 भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के मंत्रियों ने एक संयुक्त बैठक की। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार को लेकर इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स (आईजीएन) के तहत हुई बातचीत की समीक्षा की गई।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में यूएनएससी सुधार की मौजूदा स्थिति और इसकी संभावनाओं पर भी चर्चा की। मंत्रियों ने कहा कि दुनिया में लगातार मुश्किल होते भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत अब पहले से कहीं ज्यादा है।

जी-4 मंत्रियों ने कहा कि यूएनएससी इस समय अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी मुख्य जिम्मेदारी प्रभावी तरीके से निभाने में सक्षम नहीं है। सुरक्षा परिषद में सही प्रतिनिधित्व, उसकी वैधता, विश्वसनीयता और असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मंत्रियों का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह सुरक्षा परिषद का करीब आठ दशक पुराना ढांचा है, जो अब आज की भू-राजनीतिक हकीकत को सही तरीके से नहीं दिखाता।

उन्होंने कहा कि यह पुराना ढांचा शांति और सुरक्षा से जुड़ी आज की और भविष्य की चुनौतियों से सही तरीके से निपटने में भी रुकावट बन रहा है। इसी को देखते हुए जी-4 मंत्रियों ने कहा कि यूएनएससी में जल्द से जल्द सुधार करना बेहद जरूरी है, ताकि सुरक्षा परिषद आज की जरूरतों के हिसाब से बेहतर तरीके से काम कर सके और मौजूदा वैश्विक हालात को सही मायने में दिखा सके।

उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों तरह के सदस्यों की संख्या बढ़ाना इस सुधार का एक अहम हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ज्यादातर सदस्य देश भी इस रुख का समर्थन करते हैं। इस सिलसिले में जी-4 मंत्रियों ने उन क्षेत्रों और समूहों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत दोहराई, जिनकी सुरक्षा परिषद में अभी पर्याप्त भागीदारी नहीं है या बिल्कुल प्रतिनिधित्व नहीं है। इनमें खास तौर पर अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र शामिल हैं।

मंत्रियों ने कहा कि इन क्षेत्रों को स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की यूएनएससी सदस्यता में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व के मामले में हुई ऐतिहासिक नाइंसाफी को भी स्वीकार करने की जरूरत बताई। इसके साथ ही जी-4 मंत्रियों ने कहा कि उन संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों की भागीदारी भी बढ़नी चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र के दूसरे उद्देश्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

जी-4 मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स (आईजीएन) में अफ्रीकी समूह की ओर से पेश किए गए सुधार मॉडल का स्वागत किया। उन्होंने एक बार फिर यूएनएससी में अफ्रीका को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग का समर्थन किया। इसमें सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में अफ्रीका को प्रतिनिधित्व देने की मांग भी शामिल है।

जी-4 मंत्रियों ने कहा कि करीब 18 साल से चल रही गतिविधियों के बावजूद आईजीएन प्रक्रिया यूएनएससी में वास्तविक सुधार की दिशा में कोई ठोस नतीजा निकालने में काफी हद तक नाकाम रही है। उन्होंने आईजीएन के पिछले सत्र के दौरान भी कोई खास प्रगति नहीं होने पर गहरी चिंता जताई।

खास तौर पर मंत्रियों ने टेक्स्ट के आधार पर औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले ही तथाकथित ‘ब्रिजिंग प्रपोजल’ पेश किए जाने को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के उन सदस्य देशों के रुख को ध्यान में नहीं रखा गया, जो स्पष्ट रूप से बहुमत में हैं और यूएनएससी की स्थायी और अस्थायी, दोनों तरह की सदस्यता बढ़ाने का समर्थन करते हैं।