संयुक्त राष्ट्र, 25 सितंबर (आईएएनएस)। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 में से 14 सदस्य देश युद्ध समाप्त करने के पक्ष में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रुख का विरोध करने वाला एकमात्र देश खुद रूस है। विदेश मंत्री के मुताबिक, रूस अपनी वीटो पावर (निषेधाधिकार) का इस्तेमाल सिर्फ युद्धविराम रोकने के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक शांति को बाधित करने के लिए कर रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह संघर्ष केवल यूक्रेन या यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है। यूक्रेन पूर्ण और बिना किसी शर्त के युद्धविराम के लिए पूरी तरह तैयार है।
सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। इनमें से 14 सदस्य किसी न किसी रूप में तुरंत युद्धविराम का समर्थन करते हैं। इनमें चार स्थायी सदस्य भी शामिल हैं। सिर्फ एक देश लड़ाई खत्म होने की राह में रुकावट डाल रहा है और वह खुद हमलावर देश है।”
सिबिहा ने कहा कि रूस सिर्फ युद्धविराम को वीटो नहीं कर रहा, बल्कि शांति को वीटो कर रहा है। पुतिन इस युद्ध को बहुत पहले खत्म कर सकते थे, लेकिन वह हर दिन तनाव और लड़ाई को और बढ़ाने का रास्ता चुन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह युद्ध रुकना चाहिए। यूक्रेन इसे अभी खत्म करना चाहता है। हम पूर्ण और बिना किसी शर्त के युद्धविराम के लिए तैयार हैं। हम ऊर्जा और खाद्य से जुड़े मामलों में भी युद्धविराम के लिए तैयार हैं। हम इसी वक्त, यहीं रुकने के लिए तैयार हैं।
यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा कि हमने यह युद्ध शुरू नहीं किया था। हमारे देश पर हमला हुआ था। हम लड़ाई जारी रखे हुए हैं क्योंकि हम अपने घर और देश की रक्षा कर रहे हैं। हमें यह युद्ध अभी रोकना होगा, इससे पहले कि पुतिन आपके घर में दाखिल हो जाएं। वह पहले ही दरवाजे तक पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ यूक्रेन का युद्ध नहीं है। यह सिर्फ यूरोप का युद्ध भी नहीं है। यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है। सबसे बुरे हालात को रोकना इस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति और इसके बाहर मौजूद लोगों की कोशिशों पर निर्भर करता है।
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि हम बस रूस की उन क्षमताओं पर हमला कर रहे हैं जो उसे ताकतवर बनाती हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि हमें पता है कि पुतिन ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिनिधियों से फिर वादा किया कि उन्हें बस कुछ और महीने चाहिए। शायद यह पांच सालों में 17वीं या 18वीं बार है जब उन्होंने यह वादा किया है। हमेशा यही बात होती है ‘बस कुछ और महीने’ और फिर वह समय-सीमा आगे बढ़ा देते हैं। इस बार भी पुतिन नाकाम रहेंगे।
