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वाशिंगटन समिट के बाद चीन की ‘पांडा डिप्लोमेसी’, अमेरिका भेजे गए ‘पिंग-पिंग’ और ‘फू शुआंग’

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बीजिंग, 27 सितंबर (आईएएनएस)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर अमेरिका पहुंचे थे। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनका रेड कार्पेट वेलकम किया ,उनके सम्मान में डिनर रखा, और दोनों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करने को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता भी हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक काफी रचनात्मक रही। अब द्विपक्षीय संबंधों को नई रफ्तार दो जायंट पांडा ‘पिंग पिंग’ और ‘फू शुआंग’ भी देंगे। ये दोनों रविवार को अमेरिका रवाना किए गए।

सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीन ने रविवार को अमेरिका दो जायंट पांडा भेजे। रिपोर्ट के अनुसार, पांडा को भेजने पर पहले ही सहमति बन गई थी, लेकिन उनके रवाना होने की घोषणा गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा के दौरान की गई थी।

काले और सफेद रंग के ये जीव दुनिया भर में बहुत लोकप्रिय हैं और चीन विदेशी संबंध बेहतर बनाने के लिए “पांडा डिप्लोमेसी” प्रोग्राम के तहत इन्हें दूसरे देशों को देता है।

सरकारी समाचार एजेंसी सिंहुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिंग पिंग और फू शुआंग रविवार सुबह करीब 3:00 बजे (स्थानीय समयानुसार) चेंगदू शुआंग्लियू इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक चार्टर्ड फ्लाइट से रवाना हुए।

चीन के सरकारी मीडिया आउटलेट ‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, 15 घंटे की उड़ान के दौरान दोनों के पोषण और खान-पान का पूरा ध्यान रखा गया है। दोनों के लिए स्टीम्ड कॉर्न बन्स, बांस के अंकुर और गाजर तैयार कर रखा गया।

ये पांडा जॉर्जिया की राजधानी अटलांटा स्थित एक जू (चिड़ियाघर) में अगले 10 साल बिताएंगे।

वहीं, चीन से इन्हें पूरे सम्मान के साथ विदा किया गया। इनके लिए ‘चेंगदू रिसर्च बेस ऑफ जायंट पांडा ब्रीडिंग’ की ओर से विदाई समारोह आयोजित किया गया। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों के साथ उड़ान भरने के लिए अमेरिकी पक्ष ने अनुभवी कीपर भेजे थे।

इनके आने की तैयारी में, जू अटलांटा ने पांडा के लिए अपनी सुविधाओं को बेहतर बनाया है और जानवरों की देखभाल करने वालों की एक टीम तैयार की है।

इसने बांस की लगातार और लंबे समय तक सप्लाई भी पक्की की है, जो अटलांटा में ही उगाया जाता है; यहां का मौसम चेंगदू जैसा ही है। जू अटलांटा ने पहले 1999 से शुरू करके 25 साल तक चीन से उधार लिए गए पांडा रखे थे, लेकिन 2024 के बाद से वहां कोई पांडा नहीं था।

दोनों पांडा का जन्म 2020 में हुआ था। नर पांडा ‘पिंग पिंग’ अब छह साल का है, जबकि मादा पांडा ‘फू शुआंग’ अगले महीने छह साल की हो जाएगी। कैद में रहने वाले पांडा आमतौर पर लगभग 30 साल तक जीवित रहते हैं।

इन रोएंदार जीवों को दशकों से बीजिंग की कूटनीतिक सद्भावना के ‘सॉफ्ट-पावर एंबेसडर’ के तौर पर दुनिया भर में भेजा जाता रहा है। 1972 में, अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की ऐतिहासिक यात्रा के बाद चीन ने वाशिंगटन को पांडा का एक जोड़ा तोहफे में दिया था।

इस साल की शुरुआत में, बीजिंग ने जापान से अपने दो पांडा वापस बुला लिए थे। यह कदम एक कूटनीतिक विवाद के बाद उठाया गया था, जो तब शुरू हुआ जब जापान के प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि ताइवान पर किसी भी हमले की स्थिति में टोक्यो सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।