संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर (आईएएनएस)। कंबोडिया, भारत और कई दूसरे देशों ने ऑनलाइन स्कैम सेंटर, आतंकवाद, तस्करी और संगठित अपराध करने वाले नेटवर्क से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत करने की मांग की है। ये आपराधिक नेटवर्क टेक्नोलॉजी और देशों की सीमाओं के पार मौजूद फाइनेंशियल सिस्टम का इस्तेमाल करके ऐसी गतिविधियां चलाते हैं, जिनसे कोई एक सरकार अकेले आसानी से नहीं निपट सकती।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में दी गई इन चेतावनियों से यह भी सामने आया कि अब अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का मतलब सिर्फ पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रह गया है।
वक्ताओं ने कहा कि आज खतरे मोबाइल फोन, फाइनेंशियल चैनलों और अलग-अलग देशों में फैले आपराधिक संगठनों के जरिए आसानी से सीमाएं पार कर सकते हैं।
कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री प्राक सोखोन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल टेक्नोलॉजी विकास की रफ्तार बढ़ा सकती हैं, लेकिन अगर इनका गलत इस्तेमाल किया जाए तो ये असुरक्षा, असमानता और सीमा पार अपराधों को भी बढ़ावा दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि कंबोडिया ने ऑनलाइन धोखाधड़ी से लड़ने को अपनी ‘सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में से एक’ बनाया है।
कंबोडिया अपने कानूनों और संस्थाओं को मजबूत कर रहा है। इसके साथ ही स्कैम सेंटरों और उन्हें चलाने वाले आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई भी बढ़ाई जा रही है।
सोखोन ने कहा कि ये नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं, इसलिए सिर्फ किसी एक देश के अंदर कार्रवाई करके इन्हें पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “कोई भी देश अकेले इसमें कामयाब नहीं हो सकता।”
कंबोडिया ने हाल ही में ऑनलाइन स्कैम को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया था। इसमें संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और क्राइम ऑफिस, इंटरपोल और दूसरे संगठनों का सहयोग मिला था।
सोखोन ने ऑनलाइन स्कैम चलाने वाले नेटवर्क को तोड़ने और खत्म करने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मिलकर कार्रवाई करने की मांग की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि आतंकवाद अब भी अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए लगातार बना हुआ खतरा है।
उन्होंने सरकार के समर्थन से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को ‘वैश्विक व्यवस्था पर सीधा हमला’ बताया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति में कोई ढील नहीं होनी चाहिए।
जयशंकर ने एआई के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इसके गलत इस्तेमाल से पहले से मौजूद पक्षपात और बढ़ सकता है और लोगों तथा देशों के बीच आपसी सम्मान कमजोर हो सकता है। इस तरह उन्होंने नई टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को कट्टरपंथी नेटवर्क और आतंकवाद को सरकारी समर्थन जैसी पुरानी सुरक्षा चिंताओं से भी जोड़ा।
कोलंबिया ने देशों से आतंकवाद की एक साझा कानूनी परिभाषा पर सहमत होने की अपील की। उसने देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने, कानूनी और न्यायिक सहयोग बढ़ाने तथा आतंकवाद की फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की भी मांग की।
आतंकवाद की ऐसी परिभाषा पर पूरी दुनिया में सहमति नहीं होने की वजह से अपराधियों पर मुकदमा चलाने, उनकी फंडिंग रोकने और आतंकवाद को दूसरी तरह की हिंसा से अलग पहचानने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें मुश्किल हो जाती हैं।
डोमिनिकन रिपब्लिक ने पड़ोसी देश हैती में आपराधिक संगठनों की गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी। उसने कहा कि ये संगठन इलाकों पर कब्जा कर रहे हैं, हथियारों और लोगों की तस्करी कर रहे हैं और बच्चों की भर्ती भी कर रहे हैं।
डोमिनिकन रिपब्लिक के राष्ट्रपति लुइस अबिनाडर ने कहा कि ये नेटवर्क पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंजूर सुरक्षा बल की पूरी तैनाती की मांग की। उनके मुताबिक, इस मिशन के लिए जितने लोगों की जरूरत है, फिलहाल उसका केवल एक छोटा हिस्सा ही उपलब्ध कराया गया है।
सेशेल्स ने कहा कि सीमा पार संगठित अपराध, ड्रग्स की तस्करी और गैरकानूनी तरीके से मछली पकड़ने जैसी गतिविधियां उसकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रही हैं। राष्ट्रपति मैथ्यू हर्मिनी ने देशों के बीच ज्यादा खुफिया जानकारी साझा करने, समुद्री इलाकों की निगरानी बढ़ाने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को ठोस मदद देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जिन छोटे देशों को बहुत बड़े समुद्री इलाके की निगरानी करनी पड़ती है, उनसे अमीर देशों जैसे सुरक्षा मानकों की उम्मीद नहीं की जा सकती, अगर उन्हें इसके लिए जरूरी उपकरण और संसाधन ही न दिए जाएं।
फिलीपींस ने मानव तस्करी और प्रवासी कामगारों के शोषण की तरफ ध्यान दिलाया। फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा लाजारो ने कहा कि किसी प्रवासी का कानूनी दर्जा चाहे जो भी हो, उसे मानवाधिकारों की सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खतरनाक प्रवासी रास्तों से सफर करने वाले लोगों के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।
