चेन्नई, 28 सितंबर (आईएएनएस)। डीएमके ने जेम ग्रुप के चेयरमैन आर. वीरमणि के खिलाफ यौन शोषण के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी से) से कहा है कि वह मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और दो मंत्रियों से उन आरोपों के बारे में पूछताछ करे, जिनमें कहा गया है कि पार्टी ने उन्हें बचाया था।
डीएमके के कोषाध्यक्ष और सांसद टी.आर. बालू ने एसआईटी को एक याचिका सौंपी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय, मंत्री अधव अर्जुन और कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार के बयानों के पीछे के सबूत मांगे गए। याचिका में कहा गया कि ये दावे जांच के लिए अहम हैं।
नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़े एक मामले में वीरमणि को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले ने राजनीतिक बयानबाजी और निष्पक्ष जांच की मांग को हवा दी है।
बालू की याचिका के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने 25 सितंबर को आरोप लगाया कि डीएमके वीरमणि को बचा रही थी। याचिका में कहा गया है कि उसी दिन अधव अर्जुन ने दावा किया कि पार्टी ने वीरमणि को बचाया और उनके खिलाफ पहले से चल रहे एक मामले को गलत तरीके से बंद कर दिया।
याचिका के मुताबिक, निर्मल कुमार ने 26 सितंबर को आरोप लगाया कि डीएमके को वीरमणि को बचाने के बदले 500 करोड़ रुपये मिले थे।
डीएमके ने इन दावों को मानहानिपूर्ण बताया। बालू ने कहा कि जांचकर्ताओं को इन बयानों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि हो सकता है कि इन तीनों नेताओं के पास मामले से जुड़े ऐसे सबूत हों जो उन्होंने अभी तक पुलिस को नहीं दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि उन्हें जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी मिली हो, जिसमें केस डायरी की सामग्री भी शामिल हो सकती है और उन्होंने उसे सार्वजनिक कर दिया हो।
उन्होंने एसआईटी से यह पता लगाने को भी कहा कि क्या ये आरोप बेबुनियाद हैं।
याचिका में जांचकर्ताओं से आग्रह किया गया कि वे मुख्यमंत्री और दोनों मंत्रियों को बुलाएं, उनके बयान दर्ज करें और उनके दावों का समर्थन करने वाले कोई भी दस्तावेज या अन्य सामग्री हासिल करें। इसमें यह भी पूछा गया कि मामले से जुड़े सबूत जांच अधिकारियों को पहले क्यों नहीं सौंपे गए और क्या बिना इजाजत के गोपनीय रिकॉर्ड देखे या उजागर किए गए।
बालू ने एसआईटी से कहा कि वह तुरंत सबूत इकट्ठा करे और उन्हें छिपाने या नष्ट होने से रोके। उन्होंने कहा कि अगर जांच में यह पता चलता है कि जानकारी छिपाई गई थी, जांच से जुड़ी सामग्री गलत तरीके से उजागर की गई थी, या आरोप जानबूझकर झूठे थे, तो ‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम’ (पोक्सो) और ‘भारतीय न्याय संहिता’ के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
डीएमके ने कहा कि कथित अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसका पद कुछ भी हो, कानून का सामना करना चाहिए और सार्वजनिक दावों की निष्पक्ष जांच से एसआईटी की जांच पर भरोसा बढ़ेगा।
