टोक्यो, 28 सितंबर (आईएएनएस) मनु भाकर के पिता राम किशन भाकर ने माना कि दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट स्टार शूटर का प्रदर्शन एशियन गेम्स 2026 में उनके मानकों के मुताबिक नहीं था। उन्होंने कहा कि मनु ने अपने फैंस के लिए बहुत ऊंचा स्टैंडर्ड और उम्मीदें कायम की हैं।
चार इवेंट्स में हिस्सा लेने के बावजूद मनु भाकर एशियन गेम्स 2026 से बिना कोई मेडल जीते लौटेंगी। वह 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल में तीसरे स्थान पर क्वालीफाई करने के बाद पांचवें स्थान पर रहीं, जबकि इसी टीम इवेंट में भारत चौथे स्थान पर रहा। इसके बाद वह 25 मीटर पिस्टल फाइनल में जगह नहीं बना पाईं और टीम प्रतियोगिता में भारत पांचवें स्थान पर रहा।
सोमवार को 25 मीटर पिस्टल क्वालिफिकेशन में, उन्होंने 579-18x का स्कोर किया और 11वें स्थान पर रहीं, जिससे वह व्यक्तिगत फाइनल में भी जगह नहीं बना पाईं। राम किशन ने ‘आईएएनएस’ से कहा, “मनु का प्रदर्शन उनके स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं था, क्योंकि उन्होंने भारतीय फैंस के लिए बहुत ऊंचा स्टैंडर्ड और उम्मीदें कायम की हैं। मेरी उम्मीद के मुताबिक, उनका स्कोर 585 से ज्यादा होना चाहिए था। यह 585 से 595 के बीच होना चाहिए था। आज का स्कोर काफी नहीं था।”
25 मीटर पिस्टल क्वालिफिकेशन में हुई तकनीकी गड़बड़ी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, “राही बहुत अच्छी शूटिंग कर रही थीं, लेकिन अचानक उनका एक शॉट रिकॉर्ड नहीं हुआ। मुझे लगता है कि यह किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ होगा।” उन्होंने बताया कि राही का प्रदर्शन अच्छा था, लेकिन आखिरी रैपिड सीरीज के दौरान एक शॉट टारगेट पर दिखाई नहीं दिया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ। हालांकि, इसके बावजूद राही ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, “हालांकि, बाद में जूरी ने कहा कि शॉट टारगेट से बाहर चला गया था, जिस पर मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं है, क्योंकि राही एक बहुत अनुभवी शूटर हैं, और यह कुछ और भी हो सकता है। जूरी को जांचने दें कि यह क्या है, वरना सब कुछ ठीक चल रहा था।”
जापान में शूटर्स की यात्राओं से जुड़ी जो दिक्कतें आ रही हैं, उनके बारे में बात करते हुए राम किशन ने बताया, “अगर आपका मैच 10 बजे है और आपको 6 बजे की बस पकड़नी पड़ती है, तो आपको हर दिन लगभग 4 से 5 घंटे बिना वजह बिताने पड़ते हैं, और रेंज की हालत भी बहुत खराब है। वे गैलरी के इतने करीब हैं कि अगर कोई एथलीट वहां से गुजरता है, तो उन्हें परेशानी होती है। इसी कारण मुझे लगता है कि अगर जापान ऐसे इवेंट्स आयोजित करना चाहता है, तो उसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।”
