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आईएसआईएस से जुड़े ‘वॉयस ऑफ हिंद’ मॉड्यूल पर बड़ा फैसला, एनआईए कोर्ट ने चार दोषियों को सुनाई सजा

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नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली की राऊज एवेन्यू जिला अदालत परिसर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) से जुड़े ‘वॉयस ऑफ हिंद’ आतंकी साजिश मामले में चार दोषियों को सजा सुनाई।

एनआईए के अनुसार, उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी, रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को छह-छह साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं अफशान परवेज जराबी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है।

अदालत ने उमर निसार पर 36 हजार रुपए, रमीज अहमद लोन पर 31 हजार रुपए, तनवीर अहमद भट पर 23 हजार रुपए और अफशान परवेज जराबी पर 9 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

चारों आरोपियों को विशेष अदालत ने इससे पहले 17 सितंबर को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अलग-अलग अपराधों का दोषी पाया था।

एनआईए के मुताबिक मामला आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री के प्रसार, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने, उनकी भर्ती करने और प्रतिबंधित आतंकी संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़ा है।

एनआईए के केस के मुताबिक, साजिश का उद्देश्य भारत में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाकर उनकी भर्ती करना और उन्हें भारत के खिलाफ हिंसक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना था।

जांच एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग संघर्ष वाले क्षेत्रों से काम कर रहे आईएसआईएस से जुड़े लोगों ने भारत में मौजूद अपने सदस्यों के साथ मिलकर फर्जी ऑनलाइन पहचान के जरिए एक नेटवर्क तैयार किया था। इसका इस्तेमाल आईएसआईएस से जुड़े प्रचार के प्रसार के लिए किया जाता था। एनआईए ने दावा किया कि ऑनलाइन गतिविधियों के साथ जमीन पर आतंकी फंडिंग से जुड़ी गतिविधियां भी की जा रही थीं।

एनआईए की जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग भारत केंद्रित आईएसआईएस प्रचार पत्रिका ‘सौत-अल-हिंद (द वॉयस ऑफ हिंद)’ के लिए सामग्री तैयार करने, उसे संपादित करने, प्रकाशित करने और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाने में शामिल थे।

जांच एजेंसी के अनुसार, यह नेटवर्क भारतीयों को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान समेत आईएसआईएस से प्रभावित अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए प्रेरित करने और इसमें मदद करने का भी काम करता था।

एनआईए ने जांच के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सामग्री बरामद करने का दावा किया। इनमें ‘वॉयस ऑफ हिंद’ की पीडीएफ, मारे गए आतंकियों के पोस्टर, कट्टरपंथ से जुड़ी सामग्री, आईएसआईएस के प्रचार से जुड़े वेब लिंक, आईएसआईएस के झंडे वाली टी-शर्ट, हथियार हासिल करने से संबंधित चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा आईएसआईएस के बैनर और झंडे शामिल थे।

एजेंसी के मुताबिक, अदालत ने चारों दोषियों की अलग-अलग भूमिकाओं को भी माना है।

उमर निसार को ‘वॉयस ऑफ हिंद’ पत्रिका, टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री फैलाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने की गतिविधियों में शामिल पाया गया।

रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाकर संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में शामिल पाया गया।

वहीं, अफशान परवेज जराबी को टेलीग्राम चैनलों के जरिए ‘वॉयस ऑफ हिंद’ पत्रिका के लिए लेख प्रकाशित और प्रसारित करने के साथ आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार करने और युवाओं को संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में शामिल पाया गया।

एनआईए ने इस मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ एक मुख्य चार्जशीट और चार सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, जांच में आरोपियों के आईएसआईएस के ‘वॉयस ऑफ हिंद’ मॉड्यूल से जुड़े होने और ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका सामने आई। मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई अभी जारी है।