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भाजपा की आपत्ति के बाद उमर अब्दुल्ला का यू-टर्न, विधेयकों का भत्ता बढ़ाने वाले बिल वापस

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श्रीनगर, 29 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा के विरोध के बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री, मंत्रियों के वेतन और विधायकों के भत्तों में वृद्धि से संबंधित तीन विधेयक वापस ले लिए।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को मुख्यमंत्री, मंत्रियों के वेतन और विधायकों के भत्तों में वृद्धि से संबंधित तीन विधेयक पेश किए थे।

कानून, न्याय और संसदीय कार्य विभाग का प्रभार भी संभालने वाले मुख्यमंत्री उमर ने मुख्यमंत्री के मासिक वेतन को 70,000 रुपए से बढ़ाकर 95,000 रुपए और मंत्री के वेतन को 65,000 रुपए से बढ़ाकर 85,000 रुपए प्रति माह करने का प्रस्ताव रखा था।

मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए विधेयकों में विधायकों के भत्तों को 1.30 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.65 लाख रुपए करने का भी प्रस्ताव था।

तीनों विधेयकों को वापस लेते हुए मुख्यमंत्री उमर ने सदन को बताया कि मैं हमेशा से मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों के वेतन और विधायकों के भत्तों में वृद्धि के खिलाफ रहा हूं। उनके (भाजपा) एक विधायक ने मुझे पत्र लिखकर विधायकों के भत्तों में वृद्धि करने का अनुरोध किया था। अब वे इन विधेयकों का विरोध करके राजनीति कर रहे हैं। जब वे सत्ता में थे, तब उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों के लिए कुछ नहीं किया और आज जब हम सत्ता में हैं, तो वे हम पर कुछ न करने का आरोप लगा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा कहा है कि अगर एक भी विधायक मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वेतन और विधायकों को मिलने वाले भत्तों में वृद्धि का विरोध करता है, तो मैं इन्हें कभी नहीं बढ़ाऊंगा। इसलिए, मैं इन विधेयकों को वापस लेता हूं और कल हम नए विधेयक लाएंगे।

भाजपा विधानसभा के चल रहे शरदकालीन सत्र में राष्ट्रीय परिषद का कड़ा विरोध कर रही है, जो कल समाप्त होगा। कल भाजपा ने राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि यह अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता देने से जुड़ जाता है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई।

भाजपा ने कहा कि अगर प्रस्ताव केवल राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए होता, तो वे इसका समर्थन करते।