बेंगलुरु, 30 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और परिवहन मंत्री बी सुरेश ने बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक की। बैठक में बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम कम करने, सड़क सुरक्षा बेहतर करने और बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के उपायों पर चर्चा हुई।
विधान सौध में हुई बैठक में पॉइंट्स आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम शुरू करने पर चर्चा की गई। इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर ड्राइवर के लाइसेंस से पॉइंट्स जोड़े जाएंगे।
पेनल्टी पॉइंट्स की तय सीमा तक पहुंचने के बाद संबंधित ड्राइवर का लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है। बैठक में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जरूरी कानूनी प्रावधानों पर भी विचार किया गया।
अधिकारियों ने परिवहन विभाग के सारथी सिस्टम को बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के ई-चालान सिस्टम से जोड़ने पर चर्चा की।
दोनों सिस्टम के जुड़ने के बाद ट्रैफिक पुलिस मौके पर ही ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता की जांच कर सकेगी। इसके अलावा ड्राइवर के पुराने ट्रैफिक उल्लंघनों की जानकारी भी देखी जा सकेगी और नए उल्लंघन को सीधे उसके डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जा सकेगा।
बैठक में ट्रैफिक व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले उल्लंघनों पर जुर्माना बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इनमें फुटपाथ पर पार्किंग, वन-वे सड़क पर गलत दिशा में गाड़ी चलाना, फुटपाथ पर वाहन चलाना, अनधिकृत पार्किंग, नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करना और ट्रैफिक सिग्नल तोड़ना शामिल है।
खतरनाक तरीके से वाहन चलाने और बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर ज्यादा जुर्माना लगाने पर भी विचार किया गया।
पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ विशेष कार्रवाई पर भी चर्चा हुई। इसमें बकाया जुर्माने की वसूली और जरूरत पड़ने पर वाहन को जब्त या ब्लॉकलिस्ट करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
बार-बार जुर्माने का भुगतान नहीं करने वाले वाहनों पर पाबंदी लगाने और इससे जुड़े कानूनों एवं नियमों में जरूरी बदलाव पर भी चर्चा हुई।
बैठक में बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द करने से पहले उनके लिए रोड सेफ्टी ट्रेनिंग अनिवार्य करने पर भी विचार किया गया।
इस प्रशिक्षण में सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने, सड़क सुरक्षा के नियमों और ड्राइविंग व्यवहार को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
सड़क सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले हाफ हेलमेट के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
साथ ही अनधिकृत हॉर्न, मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज रोशनी वाली हाई-इंटेंसिटी एलईडी लाइट्स के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार किया गया। ऐसे उपकरणों से ध्वनि प्रदूषण और सड़क सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ने की आशंका रहती है।
बैटरी से चलने वाले कम स्पीड के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को जरूरी ट्रैफिक नियमों के दायरे में लाने पर भी अधिकारियों ने चर्चा की। इसमें वाहन की पहचान, चालक की जिम्मेदारी और सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
बैठक में परिवहन और मोबिलिटी सेवाओं के लिए ‘वन सिटी, वन फेयर’ नीति पर भी चर्चा हुई।
इसके साथ ही कार शेयरिंग, राइड शेयरिंग, ऐप आधारित साझा परिवहन और पार्क-एंड-राइड सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तर पर नीति बनाने पर विचार किया गया।
बैठक में वाहनों के पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने की भी समीक्षा की गई। जिन वाहनों पर ट्रैफिक का जुर्माना बकाया है, उन्हें पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने पर पाबंदी लगाने की संभावना पर भी चर्चा हुई।
पुराने, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले और तकनीकी रूप से अनफिट वाहनों को स्क्रैप करने के लिए प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी विचार किया गया।
मेट्रो स्टेशनों तक यात्रियों की फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए नियमों के तहत साझा ऑटो सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में प्रमुख सड़कों पर खराब होने वाली बीएमटीसी की इलेक्ट्रिक बसों को तेजी से हटाने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
इसके अलावा व्यस्त समय में मेट्रो स्टेशनों और टेक्नोलॉजी पार्कों के बीच बस कनेक्टिविटी बेहतर करने के उपायों पर विचार किया गया।
बैठक में गृह और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पुलिस, बीएमटीसी, बीएमआरसीएल और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।
