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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन पर एनडीए नेता बोले-‘विपक्ष के पास गाली देने अलावा कोई काम नहीं’

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नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में गड़बड़ियों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए हैं।

पटना में बिहार के डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विपक्ष के अभियान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विरोधियों का काम ही आलोचना करना है। उन्होंने कहा, “विरोधी का काम क्या है? सरकार चलाने वाले को कई तरह की योजनाएं बनानी पड़ती हैं, कई तरह के नियम, कानून और निर्णय लेने पड़ते हैं। अब विपक्ष को बैठकर सिर्फ गाली देना है, वही उसकी पूंजी है।”

वहीं, बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “विपक्ष के लोगों का लोकतंत्र में कोई भरोसा नहीं है। उन्हें संवैधानिक संस्थाओं में भी भरोसा नहीं है। ये लोग लोकतंत्र के हत्यारे हैं और संविधान में विश्वास नहीं रखते। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और ज्ञानेश कुमार इसके प्रमुख हैं। क्या कांग्रेस पार्टी के लोग देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न करना चाहते हैं? हालांकि, जनता इनकी सुनने वाली नहीं है, चाहे वे प्रदर्शन करें या अनशन जो चाहे कर लें।”

दूसरी तरफ, लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन का समर्थन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग की।

फखरुल हसन चांद ने कहा, “ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। ज्ञानेश कुमार ने 14 ऐसे मनमाने फैसले किए जो भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए थे। उन्होंने मनमाने तरीके से चुनाव आयोग को चलाने का काम किया है। तीन सदस्यों की कमेटी होने के बावजूद उन्होंने अपना फैसला थोपने का काम किया है। बहुत से ऐसे फैसले थे जिनकी जानकारी तक नहीं दी गई।”

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को स्वतः इस्तीफा दे देना चाहिए। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।