SGSU Advertisement
Home स्वास्थ्य पुणे : महाराष्ट्र एफडीए की कार्रवाई, सिप्ला के वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द

पुणे : महाराष्ट्र एफडीए की कार्रवाई, सिप्ला के वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द

0
4

मुंबई, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पुणे के वाडकी में स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग (सीएंडएफ) वेयरहाउस के दवाओं की बिक्री और वितरण से जुड़े लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। एफडीए ने दवाओं की पैकेजिंग, स्टोरेज, स्टॉक प्रबंधन और दस्तावेजों से जुड़ी कई कथित खामियों का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की है।

पुणे के डिवीजन-3 के सहायक आयुक्त (ड्रग्स) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मामले की दोबारा समीक्षा करने के बाद 1 अक्टूबर को लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया।

इससे पहले 27 अगस्त को वेयरहाउस के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस लेकर संशोधित प्रक्रिया के तहत मामले पर दोबारा विचार किया गया।

एफडीए के अनुसार, पहले की कार्रवाई में शेड्यूल-एच की प्रिस्क्रिप्शन दवा ‘रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स’ की पैकेजिंग और प्रचार को लेकर सवाल उठाए गए थे।

एफडीए ने आरोप लगाया कि दवा की पैकेजिंग पर ऐसे दावे किए गए थे, जिनकी अनुमति नहीं थी। इसके अलावा वेयरहाउस में दवाओं के स्टोरेज, रिकॉर्ड रखने और एक्सपायर हो चुकी दवाओं को संभालने की प्रक्रिया में भी कई कथित कमियां पाई गई थीं।

बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद एफडीए ने 4 सितंबर को सिप्ला को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने 11 सितंबर को इसका लिखित जवाब दिया और 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई में भी अपना पक्ष रखा।

कंपनी के जवाब, रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच करने के बाद लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने लाइसेंस रद्द करने का नया आदेश जारी किया।

एफडीए ने कहा कि यह फैसला दोबारा की गई पूरी प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है और यह केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना नहीं है।

एफडीए की जांच में ‘रिएक्टिन प्लस’ दवा की पैकेजिंग प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। एफडीए के मुताबिक, दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताया गया था और सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर के दर्द और दांत दर्द में राहत सहित इसके कई इस्तेमाल बताए गए थे।

एफडीए ने पैकेजिंग पर मानव आकृति और मांसपेशियों के दर्द में राहत का संकेत देने वाले चित्रों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई।