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मेरे घर का मैला उठाओ, 5 लाख दूंगा, पूर्व सीएम वाघेला के बयान पर डॉ. यज्ञेश दवे ने दी तीखी प्रतिक्रिया

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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला अपने एक बयान को लेकर सियासी निशाने पर आ गए हैं। गुजरात में बापू के नाम से मशहूर पूर्व सीएम वाघेला द्वारा ‘मैला उठाने पर 50 हजार रुपए वेतन देने’ की टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया। इस पर पलटवार करते हुए गुजरात ब्रह्म समाज के नेता डॉ. यज्ञेश दवे ने कहा कि इसकी शुरुआत उन्हें खुद अपने हाथों से करनी चाहिए, वे उन्हें 5 लाख रुपए महीना देने को तैयार हैं।

डॉ. यज्ञेश दवे ने कहा, “शंकर सिंह वाघेला गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और कई पक्षों में वो अपना स्थान ले चुके हैं और अभी कांग्रेस से जुड़ने जा रहे हैं। वो समाज और गुजरात में पिछड़ी हुई जातियों का जो एक सम्मेलन हुआ था, जिसमें आदिवासी समाज और दलित समाज भी था। ऐसे समाज के बीच वाघेला ने मैला सिर पर उठाने की शुरुआत करने की बात कही। उन्होंने बनिया, पटेल और ब्राह्मण तीनों को निशाना बनाकर कहा कि वे मैला उठाएं, 50 हजार रुपए हर महीने मैं दूंगा।”

उन्होंने आगे कहा कि बापू को ये पता होना चाहिए कि ऐसी कोई पद्धति इस देश में ही नहीं है। पुराने समय में राजाओं के शासन में ऐसा होता था, लेकिन सरकार ने सत्ता में आने के बाद से पहला काम इस पद्धति को बंद करने का किया। अब भी उस समाज को सम्मानपूर्वक जीने का मौका दे रही है और न्याय भी कर रही है।

डॉ. यज्ञेश ने कहा कि ऐसे में वो पुरानी चीजों को लाकर सिर पर मैल उठाने की जो बात कर रहे हैं, मैं उनसे कहता हूं कि ऐसा शुभ कार्य की शुरुआत आप अपने हाथों से कीजिए। मेरे घर का मैल उठाइए, मैं हर महीने आपको 5 लाख रुपए दूंगा।

दरअसल, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही अपनी बायनबाजी से सियासी घमासान शुरू कर दिया। गुजरात प्रदेश कांग्रेस की ओर से आदिवासी बहुल नर्मदा जिले के सागवाड़ा में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी, कांग्रेस विधायक अनंत पटेल समेत अन्य कई आदिवासी व दलित नेता शामिल हुए थे।

वाघेला ने कहा कि जो लोग आरक्षण के विरोधी हैं। यदि सवर्ण जातियों (जैसे पटेल, बनिया और ब्राह्मण) के लोग आदिवासी समाज का मैला उठाएं, तो वे उन्हें 50,000 रुपए महीना वेतन देने को तैयार हैं।