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जापान ने दिखाया कि कैसे ‘एशियन गेम्स’ उभरते देशों में क्रिकेट के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं: अभिराम सिंह

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नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। पर्सातुआन क्रिकेट इंडोनेशिया के चेयरमैन अभिराम सिंह यादव के मुताबिक, जिस तरह जापान ने ‘एशियन गेम्स 2026’ का इस्तेमाल क्रिकेट के लिए माहौल बनाने में किया, वह उभरते देशों के लिए एक अहम ‘ब्लूप्रिंट’ है। इससे वे बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स को लंबे समय के विकास के मौकों में बदल सकते हैं।

आईसीसी की चीफ एग्जीक्यूटिव्स कमेटी (सीईसी) में तीन एसोसिएट सदस्यों में से एक अभिराम का यह बयान तब आया, जब भारत ने कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में पुरुषों और महिलाओं के क्रिकेट में अपने गोल्ड मेडल बरकरार रखे। पाकिस्तान ने पुरुषों का सिल्वर और महिलाओं का ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि श्रीलंका ने महिलाओं का सिल्वर और पुरुषों का ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

अभिराम ने रविवार को ‘आईएएनएस’ से ​​कहा, “भारत को शानदार डबल गोल्ड के लिए और पाकिस्तान व श्रीलंका को मेडल जीतने वाले उनके अभियान के लिए बधाई। यह मुकाबला क्रिकेट के लिए अहम था, लेकिन खेलों के दौरान जो कुछ हुआ, उससे भी कई सबक मिलते हैं। जय शाह लगातार क्रिकेट को और ज्यादा समावेशी बनाने और इसे ज्यादा देशों तक ले जाने की बात करते रहे हैं। तारीफ की बात यह है कि हम उस दृष्टिकोण पर असल में काम होते हुए भी देख रहे हैं।”

एशियन गेम्स से पहले, जापान ने सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर पुरुषों के टी20 वर्ल्ड चैंपियन भारत की मेजबानी की थी। बारिश से प्रभावित पांच-पांच ओवरों के उस मैच में मेजबान टीम ऐतिहासिक उलटफेर करने से बस दो रन दूर रह गई थी। इस मुकाबले को देखने के लिए रिकॉर्ड 2,149 दर्शक पहुंचे, जो जापान में किसी क्रिकेट मैच के लिए अब तक की सबसे ज्यादा संख्या थी। टिकट बिक्री शुरू होने के कुछ ही घंटों में बिक गए थे।

उन्होंने कहा, “यह एक अहम उदाहरण है। ग्लोबल लीडरशिप ने कनेक्शन बनाने में मदद की और फिर जापान ने उस मौके को असलियत में बदल दिया। क्रिकेट को नए बाजारों में ले जाने की बात करना एक अलग बात है; और ऐसे हालात बनाना जिनमें यह असल में हो सके, यह दूसरी बात है। जापान ने जो अच्छा काम किया, वह था सभी चीजों को आपस में जोड़ना। एशियन गेम्स, इंटरनेशनल क्रिकेट, सुविधाएं, स्पॉन्सर, सरकार के साथ संबंध, मीडिया और कम्युनिटी से जुड़ाव- इन सभी को अलग-अलग चीजों के तौर पर नहीं देखा गया। इन सभी ने मिलकर खेल के लिए एक बड़ा मौका बनाया।”

ऐसे मौके बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ ‘फुल मेंबर्स’ की ही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हम मजबूत देशों से हमारे लिए दरवाजे खोलने के लिए नहीं कह सकते और फिर जब हम खुद मजबूत हो जाएं, तो दूसरों के लिए दरवाजे बंद कर दें। मौकों की एक चेन होनी चाहिए। फुल मेंबर्स एसोसिएट्स के साथ खेलें, मजबूत एसोसिएट्स डेवलपिंग एसोसिएट्स के साथ खेलें, और डेवलपिंग देश खुद बेहतर होस्ट बनें। रैंकिंग का एक अहम प्रतिस्पर्धी मकसद होता है, लेकिन उन्हें क्रिकेट खेलने वाले देशों के बीच दीवार नहीं बनना चाहिए। वे हमें बताती हैं कि हम आज कहां हैं। वे यह तय नहीं करनी चाहिए कि हम कल किसके साथ खेलना चाहते हैं।”

क्रिकेट 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का हिस्सा होगा। ऐसे में अभिराम ने फुल मेंबर्स और एसोसिएट देशों के बीच और ज्यादा मैच आयोजित करने की बात कही। उन्होंने कहा, “अगली चुनौती निरंतरता की है। जापान के सामने एक बड़ा मौका था और उसने उस मौके के आस-पास और भी बहुत कुछ करने के तरीके खोजे। हम सभी के लिए यही सीख है। जब एशियन गेम्स, आईसीसी टूर्नामेंट, कोई रीजनल कॉम्पिटिशन या कोई दूसरी इंटरनेशनल टीम हमारे देश के करीब आती है, तो हमें पूछना चाहिए: हम इस पल से और क्या बना सकते हैं? जब मौका मिले तो रैंकिंग को एक तरफ रख दें। एक-दूसरे के साथ खेलें, एक-दूसरे से सीखें और साथ मिलकर आगे बढ़ें। इसी तरह क्रिकेट असल में ग्लोबल बनता है।”