मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा विधायक और नेता राम कदम ने ठाकरे भाइयों के ‘गर्जना’ विरोध प्रदर्शन, एमपीएससी छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उत्तर प्रदेश में दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा पर प्रतिक्रियाएं दी। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह ने हमेशा हिंदू धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया है।
भाजपा विधायक राम कदम ने आईएएनएस से कहा, “कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा हिंदू शब्द को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा विधायक राम कदम ने कहा, “यह वही दिग्विजय सिंह हैं, जिन्होंने हमेशा हिंदू को बदनाम करने का प्रयास किया। हमारे पवित्र भगवा को आतंकवाद के साथ जोड़ने वाले यही दिग्विजय सिंह हैं, जब अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, मूर्ति स्थापित हुई, तो उस मूर्ति के स्वरूप को लेकर सवाल उठाने वाले यही हैं। अयोध्या में राम मंदिर बने ही नहीं, उसका फैसला हिंदू के पक्ष में ना आए, अगर आता है तो देरी से आए, ऐसे क्रूर विचार, हिंदू विरोधी विचार कांग्रेस नेताओं के थे, अभी भी हैं।”
राम कदम ने कहा, “ठाकरे बंधुओं का मोर्चा, मोर्चा था या फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता? वहां पर कोई गब्बर सिंह बनकर आया था, कोई चुनाव आयुक्त के रूप में आया था और भी कई सारे बहुरुपिए थे। मंच पर कौन सबसे अधिक और अच्छा झूठ बोल सकता है, शायद उसकी प्रतियोगिता लगी थी। झूठ पर झूठ नेता बोले जा रहे थे। एक साल पूर्व अगर सटीक कहा जाए तो 11 महीने पहले नवंबर 2025 में इन्हीं सब लोगों ने सड़क पर उतरकर आंदोलन करते हुए सबूतों के साथ कहा था कि मतदाता सूची में जो दो-तीन बार नाम हैं और फर्जी वोटर्स के नाम हटाओ, किसकी मांग थी? मोर्चा जिन्होंने निकाला उन्हीं की मांग थी और वर्तमान में चुनाव आयोग वही काम कर रहा है। क्या इन सबको भूलने की बीमारी हो गई? क्या खुद की मांग को ये भूल गए? जिस ईवीएम को लेकर बात कर रहे थे, वह ईवीएम कांग्रेस के ही कार्यकाल में आई थी। कांग्रेस वाले भी उसके विरोध में बोल रहे थे, कमाल है। इसी ईवीएम पर उद्धव ठाकरे बीते 30 वर्षों तक महानगर पालिका में चुनाव जीतते आए, तब ईवीएम अच्छी थी।”
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के छात्र पुणे और नागपुर सहित महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षा पैटर्न में बदलाव के विरोध में प्रदर्शन और सत्याग्रह कर रहे हैं। इस पर राम कदम ने कहा, “एमपीएससी छात्रों के हम साथ हैं और उनकी सारी मांगें महाराष्ट्र की सरकार ने स्वीकार की है, शत-प्रतिशत मांगें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वीकार की हैं। अब जानबूझकर वहां शरद पवार गुट के नेता उन छात्रों की आड़ में अपने कार्यकर्ताओं को घुसाकर अगर अपने नेतृत्व की ओछी राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्र जिस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उसका अधिकार महाराष्ट्र सरकार के पास नहीं है। जो अधिकार राष्ट्रपति के पास है, उसे महाराष्ट्र सरकार कैसे मान ले। यह आंदोलन छात्रों का नहीं, शरद पवार गुट का है।”
