भोपाल, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी के करौंद स्थित एक निजी अस्पताल संचालक ने आयुष्मान भारत योजना में शामिल कराने के लिए कर्मचारियों की संख्या में बड़ी गफलत की है। इस बात का खुलासा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में हुआ है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आयुष्मान भारत योजना में अस्पताल को शामिल करने के लिए चिकित्सक के अलावा स्टाफ की निश्चित संख्या होनी चाहिए, मगर करौंद स्थित निजी अस्पताल अस्पताल ने यह संख्या न होने के बावजूद अपने ऑनलाइन पोर्टल में मौजूद कर्मचारियों से तीन गुना संख्या दर्शा दी।
यह मामला ईओडब्ल्यू के पास पहुंचा और उसने जब मामले की जांच की तो सामने आया कि इस अस्पताल में अलग-अलग नाम के सिर्फ 15 ही कर्मचारी हैं , जबकि इन्हीं 15 कर्मचारियों के नाम कई बार दर्ज हैं। कुल मिलाकर कर्मचारियों और चिकित्सकों की संख्या 45 बताई गई। इतना ही नहीं इन कर्मचारियों के नाम के आगे जो नंबर दर्ज था वह अस्पताल के संचालक का बताया जा रहा है।
ईओडब्ल्यू के सूत्रों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन से जब कर्मचारियों की सूची, नियुक्ति, वेतन से लेकर उनकी उपस्थिति का विवरण मांगा गया तो अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध कराने में सफल नहीं हो पाया। बताया गया है कि अस्पताल की सूची में जिन चिकित्सकों के नाम है, उनके नाम दूसरे अस्पतालों की सूची में भी दर्ज हैं। ऐसे चिकित्सकों से जब ईओडब्ल्यू ने संपर्क किया तो उन चिकित्सकों ने संबंधित अस्पताल से संबंद्ध होने से इनकार ही कर दिया।
इस अस्पताल मे पैथोलॉजी का संचालन किया जा रहा है जबकि इसके पास उसका लाइसेंस ही नहीं है, वही जिस चिकित्सक के हस्ताक्षर और सील से रिपोर्ट जारी की जाती है वह चिकित्सक यह मानने को तैयार नहीं है कि रिपोर्ट पर उसके हस्ताक्षर होते हैं।
