नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में शीर्ष नौसैनिक कमांडर्स से संवाद किया है। वह यहां आज भारतीय नौसेना के बेड़े में पहले फ्लीट सपोर्ट पोत को शामिल करेंगे। यह विशाल पोत करीब 43,500 टन वजनी है और समुद्र में तैनात युद्धपोतों को जरूरी ईंधन और अन्य सामान की आपूर्ति करेगा। इससे नौसेना समुद्र में लंबे समय तक निर्बाध रूप से अपने अभियान चला सकेगी।
फ्लीट सपोर्ट पोत की मौजूदगी के कारण भारतीय युद्धपोतों को बार-बार तट पर लौटने की जरूरत नहीं होगी। इसका लाभ यह होगा कि भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में लंबे समय तक और ज्यादा दूर तक अभियान जारी रख सकेंगे।
मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम में इस पोत के जलावतरण के दौरान मौजूद रहेंगे। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह पहला फ्लीट सपोर्ट पोत है। राजनाथ सिंह आंध्र प्रदेश से ही पांचवें फ्लीट सपोर्ट पोत की आधारशिला भी रखेंगे। यह आयोजन भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता के बढ़ते सामर्थ्य को दर्शाता है। शिपयार्ड की बढ़ती सुविधाओं व इसके विस्तार से अब बड़े और जटिल समुद्री पोतों के निर्माण की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हो रही है।
गौरतलब है कि फ्लीट सपोर्ट पोतों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि ये समुद्र में मौजूद युद्धपोतों के लिए एक तरह से चलता-फिरता रसद केंद्र बनकर काम करते हैं। इनके जरिए नौसेना के अग्रिम मोर्चे पर तैनात जहाजों की अभियान क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू व नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
इस बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा सब एरिया के कमांडर ब्रिगेडियर आर. शंकर ने रायपुर स्थित लोक भवन में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की। वहीं, पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने 5 अक्टूबर को बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की।
इस दौरान कारवार नौसैनिक अड्डे के विकास और रक्षा उद्योग व नवाचार क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई। साथ ही, राज्य में नागरिक-सैन्य समन्वय मजबूत करने के अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
