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‘कांग्रेस सरकार एसआईआर प्रक्रिया पर गलत असर डाल रही है’, एनडीए ने कर्नाटक के राज्यपाल से दखल की मांग की

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बेंगलुरु, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय भारी उद्योग और स्टील मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और चलवाडी नारायणस्वामी के नेतृत्व में एनडीए के एक डेलीगेशन ने मंगलवार को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की संवैधानिक प्रक्रिया पर कर्नाटक सरकार के गलत असर डालने पर गंभीर चिंता और नाराजगी जताई है।

भाजपा और जेडी(एस) के विधायकों और सांसदों वाले डेलीगेशन ने लोक भवन में गवर्नर थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और फॉर्म-7 एप्लीकेशन के जरिए ऑब्जेक्शन फाइल करने वाले लोगों के हितों की रक्षा के लिए दखल देने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।

एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि लगता है चीफ इलेक्टोरल ऑफिस राज्य सरकार के दबाव में आ गया और उन्होंने गवर्नर से यह पक्का करने के लिए निर्देश जारी करने की अपील की कि एसआईआर प्रोसेस के संबंध में भाजपा कार्यकर्ताओं सहित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत झूठी और बेवजह एफआईआर और क्रिमिनल केस दर्ज न किए जाएं।

ज्ञापन में कहा गया है कि एसआईआर प्रोसेस आसानी से और स्ट्रक्चर्ड तरीके से आगे बढ़ रहा है और अभी नोटिस जारी करने और क्लेम और ऑब्जेक्शन का निपटारा करने के स्टेज पर है। इसमें कहा गया है कि इस प्रक्रिया का मकसद सही, सबको साथ लेकर चलने वाला और कानूनी तौर पर वैलिड इलेक्टोरल रोल पक्का करना और यूनिवर्सल एडल्ट वोटरशिप के संवैधानिक वादे को पूरा करना है।

एनडीए डेलीगेशन ने कहा कि एसआईआर इसलिए जरूरी है ताकि वोटर रोल में अयोग्य लोगों के नाम शामिल होने से रोका जा सके और वोटर रोल की ईमानदारी को बनाए रखा जा सके और फ्री और फेयर चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। इसमें कहा गया कि कर्नाटक में एसआईआर का काम नोटिस फेज और दावों और आपत्तियों के निपटारे के एडवांस स्टेज पर है।

इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960 के रूल 13(2) का जिक्र करते हुए ज्ञापन में कहा गया कि वोटर रोल में नाम शामिल करने पर हर आपत्ति फॉर्म-7 में फाइल करनी होगी और इसे वह व्यक्ति जमा कर सकता है जिसका नाम पहले से ही वोटर रोल में शामिल हो।

एनडीए नेताओं ने कहा कि फॉर्म-7 के जरिए आपत्तियां फाइल करना एक जायज संवैधानिक अधिकार है, जो चुनाव अधिकारियों की जांच और कानून के तहत दी गई अपील प्रक्रिया के अधीन है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक साथ फॉर्म-7 आपत्तियां फाइल करने पर कोई रोक नहीं है। 16 जनवरी, 2026 के इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के एक कम्युनिकेशन और मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल्स, 2023 का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में करेक्शन की पहचान के लिए एक साथ एप्लीकेशन जमा किए जा सकते हैं।

ज्ञापन में दावा किया गया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स या असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को जमा किए जा सकने वाले फॉर्म-7 एप्लीकेशन की संख्या पर कोई रोक नहीं है और सभी ऑब्जेक्शन को इलेक्शन अधिकारियों द्वारा क्रॉस-वेरिफाई किया जाना जरूरी है। इसमें यह भी कहा गया कि बूथ लेवल एजेंट कई फॉर्म-7 एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। डेलीगेशन ने कहा, “इसलिए, फॉर्म-7 जमा करने में कोई गैर-कानूनी काम नहीं हुआ है।”

एनडीए नेताओं ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और मंत्रियों की भी आलोचना की, जिन्होंने रोक के आदेशों के बावजूद इलेक्शन कमीशन के परिसर में कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन ने मुख्य चुनाव कार्यालय के कामकाज पर गलत असर डाला। मेमोरेंडम के मुताबिक, ऐसा लगता है कि ऐसी कार्रवाइयों की वजह से रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के सेक्शन 31 के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव देने वाला एक सर्कुलर जारी हुआ है।

डेलीगेशन ने कहा कि सर्कुलर ने उन लोगों में डर पैदा कर दिया है जिन्होंने फॉर्म-7 एप्लीकेशन जमा किए थे क्योंकि यह पुलिस मशीनरी के इस्तेमाल और एसआईआर प्रोसेस में दखल को सही ठहराता हुआ लगता है। आगे आरोप लगाया गया कि लोग अब बीएनएस, 2023 के तहत क्रिमिनल केस दर्ज होने को लेकर डरे हुए हैं। उन्होंने बेलगावी, बीदर, बल्लारी और मैसूर समेत कई जिलों में दर्ज एफआईआर का हवाला दिया।

एनडीए डेलीगेशन ने गवर्नर गहलोत से आग्रह किया कि वे कर्नाटक सरकार को फॉर्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों के हितों की रक्षा के लिए सही निर्देश दें। डेलीगेशन ने कहा कि न्याय के हित में और चुनावों की पवित्रता बनाए रखने के लिए ऐसा दखल जरूरी है।