SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय कुमाऊं में महिलाओं ने शुरू की रेशम धागे की कताई, ‘ब्रांड उत्तराखंड’...

कुमाऊं में महिलाओं ने शुरू की रेशम धागे की कताई, ‘ब्रांड उत्तराखंड’ को नई पहचान की उम्मीद

0
4

हल्द्वानी, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड का रेशम विभाग अब रेशम कोया यानी कोकून उत्पादन तक सीमित न रहकर उससे धागा तैयार करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। कुमाऊं मंडल रेशम विभाग ने पहली बार महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के माध्यम से रेशम के धागे की कताई का काम शुरू कराया है। हल्द्वानी के राजकीय रेशम फार्म पनियाली में चल रही इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का साधन उपलब्ध कराने के साथ उत्तराखंड के रेशम को बाजार में नई पहचान दिलाना है।

इस पहल से तैयार होने वाले धागे की मार्केटिंग की जिम्मेदारी उत्तराखंड कोऑपरेटिव फेडरेशन के माध्यम से की जा रही है। इससे महिलाओं को तैयार उत्पाद बेचने के लिए अलग-अलग बाजारों में भटकने की जरूरत नहीं होगी। विभाग का प्रयास है कि महिलाओं को उनके श्रम का उचित मूल्य मिले और रेशम से जुड़े स्थानीय काम को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराया जा सके।

रेशम विभाग (कुमाऊं मंडल) के उपनिदेशक हेमचंद्र ने बताया कि उत्तराखंड में पहली बार महिला स्वयं सहायता समूह को जोड़कर रेशम का धागा बनाने का काम शुरू किया गया है। यह कार्य हल्द्वानी के राजकीय रेशम फार्म पनियाली में उनके कार्यालय के मार्गदर्शन में चल रहा है। उन्होंने बताया कि ‘मां दुर्गा न्यू रेशम स्वयं सहायता समूह’ के नाम से महिलाओं का समूह बनाया गया है। फिलहाल 14 महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं और धागे की कताई कर आय अर्जित कर रही हैं। कम समय में समूह की महिलाओं को करीब 25 हजार रुपए की आय हो चुकी है। तैयार किए जा रहे धागे की मार्केटिंग उत्तराखंड कोऑपरेटिव फेडरेशन, देहरादून के माध्यम से की जा रही है और फिलहाल करीब 4,500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मूल्य मिलना शुरू हुआ है। उन्होंने आगे इसमें बढ़ोतरी की संभावना भी जताई।

हेमचंद्र ने बताया कि महिलाओं को प्रशिक्षण देने में केंद्रीय रेशम बोर्ड के देहरादून सेंटर से भी सहयोग लिया गया। इस काम का विचार वर्ष 2019 का है, जब वे ऊधमसिंह नगर में तैनात थे। वर्ष 2025 से इसकी शुरुआत की गई और शुरुआत में एक-दो महिलाएं जुड़ी थीं। आय शुरू होने के बाद समूह में महिलाओं की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। उन्होंने इसे उत्तराखंड के रेशम क्षेत्र में एक नया अध्याय बताया।

स्वयं सहायता समूह की सदस्य विमल जीना ने बताया कि रेशम विभाग के उपनिदेशक हेमचंद्र के सहयोग से महिलाएं इस काम तक पहुंची हैं और अब रेशम का धागा तैयार कर रही हैं।

समूह की सदस्य सुनीता ने भी विभाग के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि रेशम से धागा तैयार करने के काम से महिलाओं को आय मिल रही है और उनके लिए स्वरोजगार का अवसर पैदा हुआ है।

रेशम विभाग के वैज्ञानिक राहुल पाल ने बताया कि महिलाओं को धागा कताई के लिए पांच दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें उत्तराखंड के वेस्ट कोकून और टसर के माध्यम से धागा तैयार करने की प्रक्रिया सिखाई जा रही है। प्रशिक्षण में कोकून को उबालने की प्रक्रिया, उसकी कताई, धागा तैयार करने के तरीके और गुणवत्ता से जुड़ी बारीकियां बताई जा रही हैं। महिलाओं को यह भी समझाया जा रहा है कि धागा तैयार करते समय कौन-कौन सी गलतियां हो सकती हैं और बेहतर गुणवत्ता का धागा कैसे बनाया जाए।

राहुल पाल ने बताया कि तैयार धागे की बिक्री उत्तराखंड को-ऑपरेटिव फेडरेशन के शोरूम के माध्यम से की जा रही है। विभाग का प्रयास है कि महिलाएं अच्छी गुणवत्ता का धागा तैयार करें, जिससे बाजार में उसकी मांग बढ़े और उनकी आमदनी में भी इजाफा हो सके।

इससे पहले हल्द्वानी क्षेत्र में रेशम विभाग की ओर से स्वयं सहायता समूहों को रेशम के कोयों से हस्तनिर्मित सजावटी सामान, ज्वेलरी और अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। कई महिलाएं इन उत्पादों के जरिए आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। अब विभाग की योजना रेशम धागा तैयार करने की इस पहल को भी बड़े स्तर पर विस्तार देने की है, ताकि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को घर के आसपास रोजगार और आय का स्थायी साधन मिल सके।