लखनऊ, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजाद समाज पार्टी-कांशी राम के अध्यक्ष और सांसद चंद्र शेखर आजाद ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उठाई गई।
इसके अलावा, उन्होंने चुनाव कराने के लिए मतदान प्रणाली की वापसी की मांग की।
यहां पत्रकारों से बात करते हुए आजाद ने कहा कि जहां तक चल रहे प्रदर्शनों का सवाल है, सबसे पहली चिंता यह है कि जंतर-मंतर पर विरोध स्थल निर्धारित किया गया है, लेकिन वहां विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। अनुमति न देने के कारण भले ही कुछ भी हों, फिर भी यह चिंताजनक है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोगों को विरोध करने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को हटाया जा सकता है, लेकिन जब तक चुनाव आयुक्तों के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव नहीं होता, यह मुद्दा बना रहेगा। पहले की तरह ही एक प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट शामिल हो, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी के प्रभाव में न आकर चुनाव आयुक्त और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त बन सके। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, लेकिन अगर लोग चुनाव प्रक्रिया पर ही अविश्वास करने लगें तो क्या होगा?
बसपा प्रमुख मायावती की मांग का समर्थन करते हुए चंद्र शेखर आजाद ने भी कहा कि चुनाव पहले वाली मतपत्र प्रणाली से होने चाहिए।
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में गोमती नदी के उफान से उत्पन्न बाढ़ की समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा कि जलस्तर बढ़ने के कारण फैजुल्लागंज और कई अन्य क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। मैं सरकार से अपील करता हूं कि बाढ़ प्रभावित लोगों की देखभाल करे, उन्हें बुनियादी सुविधाएं प्रदान करे और उनके नुकसान की भरपाई करके उनकी स्थिति में सुधार लाने का प्रयास करे।
आजाद ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के बारे में भी बात की।
उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि बकाया राशि पर 15 प्रतिशत ब्याज दिया जाना चाहिए। हालांकि, अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने मंत्रिमंडल के समक्ष एक प्रस्ताव रखा और मिल मालिकों का पक्ष लेते हुए इस फैसले को रोक दिया। बाद में, हाई कोर्ट ने मंत्रिमंडल के फैसले को खारिज कर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, (समाजवादी पार्टी की) उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन उनकी एसएलपी को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। गन्ना किसानों को जल्द से जल्द निर्धारित ब्याज दरों पर उनका भुगतान मिलना चाहिए।
