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अस्पतालों में दवाओं के बिल पर सवाल, तमिलनाडु सरकार ने दिए जांच के आदेश

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चेन्नई, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। अस्पतालों द्वारा मरीजों से दवाओं और मेडिकल सामान पर एमआरपी या उसके करीब कीमत वसूलने की शिकायतों के बाद तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल निदेशालय ने चुनिंदा अस्पतालों और उनसे जुड़ी फार्मेसियों के निरीक्षण के आदेश दिए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल दवाइयां सस्ते दाम पर खरीदते हैं लेकिन मरीजों से पूरी एमआरपी वसूलते हैं। इसी को लेकर जांच होगी और जांच में दवाएं, मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स शामिल होंगे। खरीद की कीमत और मरीजों के बिल की तुलना जांचकर्ताओं द्वारा की जएगी ताकि ज्यादा पैसा वसूलने और कीमत या लेबलिंग नियमों के उल्लंघन का पता लगाया जा सके।

एक अलग आदेश में अधिकारियों को आदत बनाने वाली प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की गैरकानूनी बिक्री पर जांच तेज करने को कहा गया है। टैपेंटाडोल और नाइट्राजेपम के दुरुपयोग की रिपोर्ट्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बताया गया है और इस पर कड़ी निगरानी की जरूरत बताई गई है।

ड्रग्स कंट्रोल के जॉइंट डायरेक्टर और कंट्रोलिंग अथॉरिटी-सह-लाइसेंसिंग अथॉरिटी एस. गुरु भारती ने 1 अक्टूबर को दोनों आदेश असिस्टेंट डायरेक्टर्स को जारी किए। इसमें किन रिकॉर्ड की जांच करनी है और रिपोर्ट कैसे देनी है, इसका पूरा ब्योरा दिया गया है।

यह कार्रवाई अस्पतालों द्वारा सामान खरीदने की कीमत और मरीजों से वसूली गई कीमत में अंतर को लेकर उठी चिंताओं के बाद की गई है।

इंस्पेक्टर्स को कहा गया है कि वे कीमतों में बड़ा अंतर, ज्यादा पैसा वसूलने के संदेह, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और प्राइसिंग या लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को दस्तावेजों के साथ दर्ज करें। कोई भी जानकारी बिना दस्तावेज के नहीं होनी चाहिए।

निरीक्षण प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा और एक समेकित रिपोर्ट निदेशालय को सौंपनी होगी। एस. गुरु भारती ने कहा कि जहां कीमतों के नियमों का उल्लंघन साबित होगा, वहां ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के तहत कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई की रिपोर्ट भी दस्तावेजों के साथ निदेशालय को भेजनी होगी ताकि आगे की कार्यवाही हो सके।

दूसरे आदेश में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के दुरुपयोग को जन स्वास्थ्य के लिए चिंता बताया गया और अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में निगरानी और प्रवर्तन मजबूत करने को कहा गया।

असिस्टेंट डायरेक्टर्स को रिटेल और होलसेल दुकानों पर सरप्राइज निरीक्षण करने को कहा गया है, खासकर उन इलाकों में जहां दुरुपयोग की शिकायत या सूचना मिली है।

इन जांचों के दौरान अधिकारियों को वैध प्रिस्क्रिप्शन, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बिल, स्टॉक की स्थिति और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच करनी होगी।

उन्हें डिस्पोजेबल सिरिंज और सुइयों पर विशेष ध्यान देने को भी कहा गया है जिनका गलत इस्तेमाल या डायवर्जन हो सकता है। स्टॉक और रिकॉर्ड में किसी भी तरह के अंतर की जांच करनी होगी और गड़बड़ी की प्रकृति का पता लगाना होगा।

अस्पतालों में जांच के दौरान खरीद के बिल, प्रोक्योरमेंट प्राइस, प्रिंटेड एमआरपी, बिक्री मूल्य और बिलिंग देखी जाएगी, खासकर महंगी दवाओं और इंजेक्शन के मामले में। सभी महत्वपूर्ण निष्कर्षों को रिकॉर्ड के साथ दर्ज करना होगा।