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प्योंगयाग ने मेडिकल मदद को ‘अपमान’ बता ठुकराया, दक्षिण कोरिया की पेशकश पर विवाद

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सोल, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया ने गुरुवार को सोल की ओर से मेडिकल सप्लाई खेप भेजने की योजना को “अपमान” और “राजनीतिक उकसावा” बताते हुए खारिज कर दिया।

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की रसूखदार बहन किम यो-जोंग का बयान कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने जारी किया।

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा था कि वह मानवीय चिकित्सा सहायता कार्यक्रम के तहत प्योंगयांग के एक अस्पताल में 166 कैटेगरी की 1,431 मेडिकल चीजें भेजने की योजना बना रहा है, जो जांच, सर्जरी और इलाज के लिए जरूरी हैं।

योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने मई में यूएन सुरक्षा परिषद की उत्तर कोरिया प्रतिबंध समिति से कुछ छूट हासिल की थी।

किम ने इस कदम को “शोर-शराबे वाली और भद्दी हरकत” और “एक और नाटक” बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह हमारे देश का अपमान है, हमारे खिलाफ राजनीतिक मकसद से किया गया उकसावा है और हमारे राष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।”

उन्होंने पहले भी इसी शब्द, “नाटक,” का इस्तेमाल सोल के उस आधिकारिक निष्कर्ष को खारिज करने के लिए किया था जिसमें कहा गया था कि 21 सितंबर को हुए धमाकों, जिनमें दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हुए थे, के पीछे उत्तर कोरियाई बारूदी सुरंगें (माइंस) थीं।

उन्होंने कहा, “अब जब उनके घटिया नाटक से अच्छे बॉक्स-ऑफिस रिकॉर्ड की उम्मीद करना नामुमकिन है, तो उन्होंने ‘मेडिकल उपकरण की मदद का सीन’ नाम से एक और नाटक रचा है, जो ‘बारूदी सुरंग विस्फोट मामले’ का दूसरा भाग है।”

उन्होंने यह भी दोहराया कि प्योंगयांग का सोल के साथ जुड़ने का कोई इरादा नहीं है।

दक्षिण कोरिया को उसके आधिकारिक नाम ‘रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (आरओके) से संबोधित करते हुए कहा, “हमारे पास आरओके के साथ आदान-प्रदान या साथ चलने के लिए कुछ भी नहीं है और न ही उसके आमने-सामने आने की कोई जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “आरओके का असल रंग ढंग यही है उसमें बदलाव की गुंजाइश नहीं और वो डीपीआरके का सबसे बड़ा दुश्मन है। डीपीआरके-आरओके के तल्ख संबंधों में बदलाव की अपेक्षा बेमानी है।” डीपीआरके, ‘डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ का संक्षिप्त रूप है, जो उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम है।

खराब होते रिश्तों के बीच अंतर-कोरियाई संबंध और बातचीत के रास्ते लगभग खत्म हो चुके हैं, ऐसे में यह साफ नहीं था कि प्योंगयांग यह मदद स्वीकार करेगा भी या नहीं। इससे पहले दिन में, यूनिफिकेशन मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि योजना के मुताबिक सामान भेजने की संभावना कम है और सरकार संयुक्त राष्ट्र से समय-सीमा बढ़ाने की एक और मांग करेगी।