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अपने देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार, पश्चिम एशिया संकट का कारण हम नहीं: ईरान

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नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में ईरान के दूतावास ने पश्चिम एशिया संकट की वजह इजरायल और अमेरिका की नीतियों को बताया है। उनका कहना है कि तेहरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए “पूरी तरह तैयार” है।

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक लंबे चौड़े पोस्ट में ईरान का पक्ष रखा गया। इसमें लिखा गया कि हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में हुई घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि इस क्षेत्र में असुरक्षा और अस्थिरता का मुख्य कारण यहां के लोग नहीं हैं, बल्कि इजरायल की आक्रामक, कब्जा जमाने और जंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां हैं और इसमें अमेरिका उनकी पूरी तरह से मदद कर रहा है।

पश्चिम एशिया के हालात पर ध्यान दिलाते हुए आगे लिखा, “वर्षों तक, इस क्षेत्र के देशों का मानना ​​था कि अमेरिका और इजरायली शासन उनकी सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं। लेकिन आज, पूरे क्षेत्र में लोगों के मन में एक सीधा सा सवाल है: कतर पर हमला किसने किया? बेरूत को किसने निशाना बनाया? गाजा को खंडहर में किसने बदला? और गोलान हाइट्स समेत सीरियाई क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर कब्जा किसने कर रखा है?”

तंज कसते हुए आगे कहा कि इसमें एक ऐसा शासन जो एक तरफ तो “शांति,” “अब्राहम समझौते” और क्षेत्र के देशों के साथ संबंध सामान्य करने की बात करता है, और दूसरी तरफ अरब देशों पर हमले करता है, अरब इलाकों पर कब्जा करता है और गाजा में बेगुनाह लोगों की हत्या करके इतिहास के सबसे बड़े अपराधों में से एक को अंजाम देता है, वह कभी भी खुद को क्षेत्रीय सुरक्षा का रक्षक नहीं बता सकता।

गाजा और लेबनान को अपना प्रॉक्सी बताने वाले बयान का जवाब देते हुए कहा कि गाजा और लेबनान के लोगों को “प्रॉक्सी” (किसी और के इशारे पर काम करने वाला) के तौर पर दिखाने की कोशिश असल में लोगों का ध्यान सच्चाई से भटकाने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है। गाजा और लेबनान के लोग किसी देश के प्रॉक्सी नहीं हैं। वे इंसान हैं जो अपनी जमीन, सुरक्षा, सम्मान, जीने के अधिकार और मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। कोई भी दशकों से चले आ रहे कब्जे, विस्थापन, हत्या और लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखने की बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता और फिर उनके प्रतिरोध को सिर्फ़ राजनीतिक लेबल लगाकर नहीं समझा सकता।

दरअसल, 7 अक्टूबर (2026 में हमास के हमले की तीसरी बरसी) की पूर्व संध्या पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य अधिकारियों ने ईरान तथा उसके समर्थित समूहों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी। कैबिनेट मीटिंग में उन्होंने कहा कि हमास और उसके संरक्षक (ईरान व उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी) को किसी भी दुस्साहस का भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा और इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन और अमेरिकी अधिकारियों (जैसे माइक वाल्ट्ज) ने भी इस मौके पर कहा कि 7 अक्टूबर जैसा हमला दोबारा नहीं होना चाहिए और इसके पीछे के मुख्य स्रोतों, विशेषकर ईरान के समर्थन पर, लगाम कसना जरूरी है।

फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए संयुक्त हमले को लेकर आगे लिखा, “पिछले एक साल में, जब इजरायली शासन और अमेरिका की ओर से इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर सैन्य हमला किया गया, तो दुनिया ने देखा कि 47 सालों की पाबंदियों, दबाव और धमकियों के बावजूद ईरान परमाणु हथियारों से लैस दो शासनों के सामने मजबूती से खड़ा रहा और अपनी क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में सफल रहा। आज, आग से निकले फीनिक्स पक्षी की तरह, ईरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और किसी भी सैन्य हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।”